हिंदी जगत

जबलपुर में हुआ बिजली पर केंद्रित एक रोचक किताब का लोकार्पण

"साहित्य की दृष्टि से तो हिंदी बहुत समृद्ध भाषा है लेकिन विज्ञान और तकनीक से जुड़े विषयों में हिंदी का खजाना खाली नज़र आने लगता है.ये खजाना भरने के लिए ये ज़रूरी है कि विज्ञान और तकनीक के विषयों पर हिंदी में लिखने वाले लोगों की जी भर के सराहना की जाए.जबलपुर में रहने वाले श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ऐसे ही लेखक है जिन्होंने हिंदी को समृद्ध करने की कोशिश की है.पढ़िए बिजली उत्पादन पर उनकी एक किताब के लोकार्पण की रिपोर्ट. "

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बिजली का एक बटन दबाते ही हमारी दुनिया बदल जाती है. अन्धेरा दूर हो जाता है.ज़रूरत के मुताबिक या तो गर्मी छू मंतर हो जाती है या ठण्ड अपना दामन समेट लेती है.बिजली हमारे जीवन के लिए किसी सौगात से कम नहीं है.लेकिन वैज्ञानिक सौगात के बारे में अभी तक हिंदी में बहुत ज़्यादा तकनीकी जानकारी उपलब्ध नहीं थी.जबलपुर स्थित विद्युत निर्माण एवं वितरण कंपनी के अधीक्षण यंत्री और जनसंपर्क अधिकारी श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ने ये कमी दूर कर दी है.हाल ही में बिजली के उत्पादन, उपयोग और  बचत जैसे विषयों पर हिन्दी में उनकी एक किताब प्रकाशित हुई है.

जीनाइन प्रकाशन रायपुर द्वारा प्रकाशित “बदलता विद्युत परिदृश्य” नामक इस किताब का लोकार्पण मध्यप्रदेश विद्युत पूर्वी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री सुखवीर सिंह ने किया.अपने कार्यालय में हुए बेहद आत्मीयतापूर्ण और अनौपचारिक समारोह में उन्होंने  श्री विवेक के इस प्रयास को बेहद महत्वपूर्ण बताया.उन्होंने कहा कि ये किताब तकनीकी क्षेत्र में हिंदी लेखन में एक अहम पड़ाव की तरह है. तकनीकी विषय पर होने के बावजूद लेखक ने इसकी रोचकता बनाए रखी है.

उल्लेखनीय है कि इस किताब में श्री विवेक जी ने आंकडों की जगह मुद्दों को महत्व दिया है. इनमे से कई लेख पूर्व में सरिता, मुक्ता जैसी राष्ट्रीय पत्रिकाओं एवं कारपोरेट छत्तीसगढ़ , पावर फायनेंस कारपोरेशन व अन्य विद्युत संस्थाओं के जनरल्स में प्रकाशित हो चुके हैं.वे कहते है कि बिजली के क्षेत्र में अनुसंधान की व्यापक संभावनाएं और आवश्यकता है.उनकी ये किताब युवाओं को बिजली के क्षेत्र में अनुसंधान के प्रति रूचि जगाएगी.

संपादन - सुबोध खंडेलवाल

योगदान : Vivek Ranjan Shrivastava
प्रकाशन दिनांक : 21-05-2013
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