हिंदी जगत

स्मृति जगत में सदैव जीवित रहेंगे साज जबलपुरी

"‘‘तन्हा न अपने आपको अब पाइयें जनाब, मेरी गजल को साथ लिये जाइये जनाब‘‘ ये और इस तरह की कई गज़लें लिखने वाले लेखक,संपादक और शायर श्री साज जबलपुरी को वर्तिका संस्था ने श्रद्धांजली दी. ड्रीमलैंड पार्क में हुई इस सभा में जबलपुर के कई रचनाकार उपस्थित थे. "

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वर्तिका की स्थापना श्री साज जबलपुरी ने ही की थी. उनकी इस साहित्यिक पहल ने संस्कारधानी के साहित्यिक परिदृश्य को और अधिक समृद्ध करने में अहम भूमिका निभाई थी. वर्तिका के संरक्षक श्री एम एल बहोरिया , अध्यक्ष विवेक रंजन श्रीवास्तव, संभागीय अध्यक्ष श्री विजय नेमा अनुज , श्री सुशील श्रीवास्तव , श्रीमती सलमा जमाल , श्रीमती सुनीता मिश्र , श्री विजय तिवारी किसलय , श्री अशोक सिफर , श्री दीपक तिवारी ने  भावाभिव्यक्ति के माध्यम से उन्हें श्रृद्धांजली अर्पित की. आपने कहा कि उनकी मर्मस्पर्षी रचनाएं उन्हें स्नृति जगत में सदैव जीवित रखेंगी,  की स्मृतियां सदैव बनाये रखेगीं
इस अवसर पर सर्व श्री आलोक श्रीवास्तव संयुक्त जिलाधीश , अजय श्रीवास्तव प्रबंधक भारतीय रेल जबलपुर , मुकुल अर्पित , ओंकार श्रीवास्तव , गार्गीशरण मिश्र , राज कुमार तिवारी सुमित्र , प्रो सी बी श्रीवास्तव विदग्ध , जवाहर लाल चौरसिया , विजय जायसवाल , शिवानी परोहा , हरि शंकर दुबे व बहुतेरे रचनाकारो ने तथा गुंजन , कादम्बरी , पाथेय , दिशा , ड्रीम लैणड फन पार्क , परोहा बिल्डर्स आदि  विभिन्न संस्थाओ के प्रतिनिधियो ने भी अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये .वक्ताओं. इस अवसर पर साज जबलपुरी पर एक डाक्युमेंट्री  विशेष रूप से डी जी केबल व सोहन सलिल के सहयोग से तैयार कर प्रदर्शित की गई .

 

योगदान : Vivek Ranjan Shrivastava
प्रकाशन दिनांक : 08-06-2013
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