विश्व में हिंदी विश्व हिन्दी सम्मेलन २०१२

शुक्रिया रूस,शुक्रिया रेडियो रूस

"जोहान्सबर्ग में हुए विश्व हिन्दी सम्मेलन में एक बार फिर से हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने का संकल्प पारित किया गया. ये संकल्प तो नया नहीं है मगर खास बात ये है कि रूस ने हिन्दी की इस मांग का समर्थन किया है. इस बारे में रेडियो रूस रेडियो रूस ने अपने समीक्षक गिओर्गी वानेत्सोवका का एक लेख छापा है."

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पूरे विश्व में फैले हिन्दी भाषी लोगों और हिन्दी के प्रति लगाव और अपनापन रखने वाले लोगो के लिए समाचार किसी टानिक से कम नहीं होगा. समाचार ये है कि रूस ने हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने के लिए अपना समर्थन दिया है. हिन्दी के प्रति इस सद्भावना के लिए वैश्विक हिन्दी भाषी समाज की तरफ से हिन्दी होम पेज रूस और रेडियो रूस के प्रति आभारी है और इसीलिये हिन्दी होम पेज की इन पंक्तियों को हमने रूस के झंडे के रंग में प्रदर्शित किया है. रूसी समीक्षक गिओर्गी वानेत्सोवका के इस लेख का संपादित अंश आप यहाँ पढ़ सकते है और रूस का आभार मानते हुए रेडियो रूस के प्रति अपनी सद्भावना भी व्यक्त कर सकते है. 

                   फिलहाल दुनिया की छह भाषाओं को सँयुक्त राष्ट्र संघ की औपचारिक भाषाओं का दर्ज़ा मिला हुआ है. ये भाषाएँ हैं - अँग्रेज़ी, अरबी, स्पानी, चीनी, रूसी और फ़्राँसिसी. इन भाषाओं में सँयुक्त राष्ट्र संघ के सभी दस्तावेज़ों का पूरा-पूरा अनुवाद किया जाता है. हिन्दी को सँयुक्त राष्ट्र की सातवीं भाषा बनाने का विचार कोई नया विचार नहीं है. १९७५ में भारत के नागपुर में हुए पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन में भी ये बात सामने आई थी.

सँयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार आज दुनिया के डेढ़ अरब लोग हिन्दी बोलते हैं. हिन्दी में बातचीत करने वाले ये लोग सिर्फ़ भारत में ही नही, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में बसे हुए हैं.चीनी, अँग्रेज़ी, अरबी और स्पानी भाषाओं के साथ-साथ हिन्दी भी दुनिया की उन पाँच भाषाओं में आती है, जिनका पूरी दुनिया में सर्वाधिक उपयोग किया जाता है. मास्को स्थित रूस के राजनीतिक तक्नोलौजी केन्द्र के उपनिदेशक अलेक्सेय मकारकिन ने कहा कि बात सिर्फ़ इतनी ही नहीं है. बात यह भी है कि आज भारत उन देशों में से एक है जो सँयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनने के लिए अपना दावा पेश कर रहे हैं.अलेक्सेय मकारकिन ने कहा : मेरा ख़याल है कि हिन्दी को सँयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा का स्थान देने की माँग इसलिए उठ रही है क्योंकि राष्ट्रसंघ की विभिन्न संस्थाओं में भारत की भूमिका बहुत ज़्यादा बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि परिषद के सभी स्थाई सदस्यों की सहमति से ही किसी नए देश को सुरक्षा परिषद में शामिल किया जा सकता है और अभी परिषद के सभी स्थाई सदस्य देश भारत के नाम पर सहमत नहीं हो पाए हैं. इसीलिए भारत ने यह वैकल्पिक रणनीति अपनाई है कि पहले अपनी भाषा को राष्ट्रसंघ में लाओ और फिर ख़ुद सुरक्षा परिषद की सदस्यता पाओ.

जोहान्सबर्ग के विश्व हिन्दी सम्मेलन में यह तय किया गया है कि दुनिया के उन विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थाओं की एक सूची बनाई जाए, जहाँ हिन्दी का पठन-पाठन और अध्ययन-अध्यापन किया जाता है. विभिन्न देशों में विदेशियों को हिन्दी सिखाने के लिए विशेष कोर्स भी तैयार किए जाएँगे. हिन्दी को राष्ट्र संघ की औपचारिक भाषा बनाने की माँग का रूस भी समर्थन करता है. रूस में अनेक विश्वविद्यालयों और संस्थाओं में हिन्दी पढ़ाई जाती है. पिछले कुछ वर्षों में इन विश्वविद्यालयों से सैकड़ों रूसी छात्र हिन्दी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं और भारतीय साहित्य के विशेषज्ञ बनकर निकले हैं. इसके अलावा पिछले कई सालों से मास्को स्थित जवाहरलाल नेहरू भारतीय सँस्कृतिक केन्द्र में भी रूसी लोगों को हिन्दी सिखाई जाती है. रूस में बहुत से लोगों ने हिन्दी की वर्णमाला यही पर सीखी है.

रेडियो रूस से साभार .रेडियो रूस के समीक्षक गिओर्गी वानेत्सोव के लेख का मूल पाठ रेडियो रूस की वेब साईट पर यहाँ पढ़ा जा सकता है. 

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प्रकाशन दिनांक : 27-09-2012
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