संसाधन पुस्तक समीक्षा

लघुकथाओं पर बात करती किताब

"अच्छी लघुकथा लिखना एक लंबी कहानी या कई बार तो उपन्यास लिखने से भी ज़्यादा कठिन होता है.हिन्दी की नई एक किताब “हथेलियों पर उकेरी कहानियाँ” लघुकथा की इसी रचना प्रक्रिया और उससे जुड़े आयामों की बात करती है. विख्यात लेखिका डॉ. स्वाति तिवारी द्वारा संपादित इस पुस्तक में स्थापित रचनाकारों के लेख और छोटी कथाओं के साथ–साथ पचास नई–पुरानी लेखिकाओं लघुकथाएँ भी संकलित हैं"

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बहुत थोड़े शब्दों में बहुत गहरी बात कहने के लिए एक खास ढंग के कौशल की ज़रूरत होती है. हथेलियों पर उकेरी कहानियाँ नामक ये किताब इस कौशल से रूबरू भी कराती है और दूसरी तरफ कुशल और नवोदित रचनाकारों की लघुकथाएं पढने का अवसर भी देती है..इस किताब का कलेवर दो भाग में है– लघुकथा का स्वरूप और लघुकथाएं. पहले भाग में उन सभी बिन्दुओं पर ध्यान दिया गया है जिनसे लघुकथा के स्वरूप को समझा जा सके. जबकि दूसरे भाग में कुछ चुनी हुए लघुकथाएं प्रस्तुत की गई है.
किताब के आरंभ में शंकर पुणतांबेकर, सुकेश साहनी, बलराम अग्रवाल, सतीश दुबे, रामेश्वर काम्बोज, सुरेश शर्मा, डॉ. शरदसिंह आदि के  विचारपरक आलेख हैं,जो नए लेखकों का मार्गदर्शन कर सकते हैं. प्रत्येक लेख के बाद सम्बंधित लेखक की लघुकथा दी गई है.संकलन के दूसरे खंड में, जैसा कि पूर्व में कहा गया, पचास लेखिकाओं की लघुकथाओं को शामिल किया गया है. इनमें अधिकतर स्त्री–विमर्श और युवा पीढ़ी की बुजुर्गों के प्रति बढ़ती हृदयहीनता की लघुकथाएँ हैं.
पुस्तक की संपादिका,डा.स्वाति तिवारी  स्वयं एक अच्छी कथाकार हैं, अतः लघुकथाओं के प्रति उनकी दृष्टि ने इस किताब को एक विशिष्टता प्रदान कर दी है. पुस्तक बारे में वे कहती हैं कि “लघुकथा की विशेषताओं ने ही ये विचार दिया कि लघुकथा पर कार्य किया जाए”. बेशक उस कार्य का परिणाम ही इस पुस्तक के रूप में आया है. उम्मीद है ये किताब साहित्यप्रेमियों और लघुकथाकारों को खूब पसंद आएगी और हाँ ये शोधार्थियों के लिए भी काफी उपयोगी साबित होगी.
इंटरनेट पर ये किताब यहाँ से खरीदी जा सकती है.

 

 


प्रकाशन दिनांक : 01-08-2012
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