संसाधन हिन्दी आलेख

तो क्या अब भारत पर काले अंग्रेजों का राज है ?

"भारत की आज़ादी के लिए हँसते-हँसते फांसी के फंदे पर चढ़ जाने वाले शहीदों ने शायद सपने में भी नहीं सोचा होगा कि आज़ाद भारत पर ऐसे भारतीय राज करेंगे जो अंग्रेजों से भी ज़्यादा अत्याचारी होंगे.उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि जिस देश को आज़ाद कराने के लिए वो अपने प्राणों की बलि चढ़ा रहे है वहाँ गोरों के जाने के बाद काले अंग्रेज राज करेंगे और शहीदों के वंशज न्याय के लिए भटकते रहेंगे. "

shahjahanpur kankori kand ramprasad bismil ashfakulla khan rajendra lahidi amar shaheed thakur roshan sinh

कांकोरी कांड को अंजाम देने में भारत के अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह आज़ाद, रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां के साथ शाहजहांपुर का एक बांका नौजवान ठाकुर रोशन सिंह भी था. २२ अगस्त १९२७ को लखनऊ की चीफ कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश लुइस शर्ट और विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रजा ने इस क्रांतिकारी को आई०पी०सी० की दफा १२१(ए) व १२०(बी) के तहत कुल १० वर्ष की कड़ी कैद और धारा ३०२ व ३९६ के अनुसार फाँसी की सजा सुनाई थी.यही सजा राम प्रसाद बिस्मिल, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ीअशफाक उल्ला खाँ को भी दी गई थी.
मौत का फरमान सुनकर ये सारे नौजवान हंस पड़े थे. ये सब जानते थे कि देश को आज़ाद कराने की कीमत उन्हें अपने खून से ही चुकानी पड़ेगी. उस समय तो ये सब हंस पड़े थे मगर यकीन किजीये कि पिछले दिनों शाहजहांपुर में जो कुछ हुआ उसे देखकर या तो ये सब फिर से बागी हो जाते और या खून के आंसू बहाने पर विवश हो जाते.
शाहजहांपुर के कुछ गुंडों ने पिछले दिनों इनमे से एक अमर शहीद रोशन सिंह की प्रपौत्री इंदू सिंह को

बेरहमी से पीटा और फायरिंग करते हुए उसकी झोपड़ी में आग भी लगा दी. उसकी गृहस्थी जलकर खाक हो गई. पहनने को कपड़े और खाने को दाना तक नहीं बचा. यह नजारा सैकड़ों लोगों ने देखा. मगर इन शहीदों के बलिदानों के बल पर आज़ादी की साँस ले रहे बुजदिल लोगों में न तो उन्हें रोकने का साहस था और ना ही अंग्रेजों के अवैध वंशजों में उन्हें इन्साफ दिलाने की हिम्मत.एसपी के आदेश पर पुलिस ने चार दिन बाद दिखावे के लिए आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और घटना के ग्यारहवे दिन एक आरोपी का शांतिभंग करने के आरोप में चालान काटकर मामला खत्म कर दिया. आरोप है कि पुलिस सत्ता पक्ष के एक विधायक के कारण इन गुंडों का साथ दे रही है.इंसाफ न मिलने पर शहीद की प्रपौत्री फिर एसपी से आकर मिली. उसने कहा कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह तीनों बच्चों के साथ आत्महत्या कर लेगी. अब एसपी ने एसआइएस से जांच के आदेश दिए हैं.जब विधायक गुंडों के साथ है तो इस जांच का अंजाम क्या होगा ये अंदाजा लगाना कोई बड़ी बात नहीं है.
उंगली कटाकर शहीदों की गिनती में आने वाले हज़ारों लोग पेट्रोल पम्प और गैस एजेंसी  चला रहे है,उनके परिवार वाले ऐशो आराम की ज़िंदगी बिता रहे है और दूसरी तरफ कुछ गुंडे देश पर अपना सबकुछ लुटा देने वाले भारत माँ के सच्चे सपूतों के वंशजों की झोपडियां जला रहे है. आज लग रहा है कि आजादी की सारी बाते झूठी है.राजनीति, पुलिस और प्रशासन के कुछ अच्छे लोगों से क्षमा प्रार्थना के साथ आज ये लिखना पड़ रहा है कि अब लोकतंत्र के नाम पर हम उन काले अंग्रेजों के गुलाम है जो कुछ वोट पाकर मंत्री बने हुए है, और उनके भी जो कुछ परीक्षाएं पास करके पुलिस और प्रशासन में बैठे है.
मै जानता हूँ सिर्फ ये लेख लिखने से कुछ नहीं होगा पर सच में, मै ये नहीं समझ पा रहा कि क्या किया जाए और कैसे किया जाए ??
सन्दर्भ एवं स्रोत - शाहजहांपुर समाचार एवं विकीपीडिया
फोटो सौजन्य - डा. क्रांत वर्मा एवं विकीपीडिया

 


प्रकाशन दिनांक : 11-06-2012
print

नवीनतम लेख

a summer camp was organised for teaching hindi in minsk city of belarus by alesia.
BOOK WRITER, POEM, POET, SUBODH