हिंदी जगत

चैन्नई के हिन्दी विरोधी आंदोलन पर बने कार्टून पर तनी राजनीति की तलवार

"तमिलनाडू में १९६० के दशक में चले हिन्दी विरोधी आंदोलन पर श्री आर.के. लक्ष्मण के एक कार्टून पर भी राजनीति की तलवार तन गई है. मरुमलार्कि द्राविड मुनैत्र कजागम यानी एमडीएमके के महासचिव श्रीमान वाइको साहब इस वर्षों पुराने कार्टून से अचानक काफी नाराज हो गए है. एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक से इसे हटाने के लिए वे ११ जून को चैन्न्नई में एक प्रदर्शन करने जा रहे है. इसे हटाने के लिए उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को पत्र भी लिखा है. "

cartoon anti-Hindi agitation Tamil Nadu vaiko mdmk

ये कार्टून बारहवी कक्षा की राजनीतिक विज्ञान विषय की किताब में छपा है.इसमें सी राजगोपालाचारी और तमिलनाडू के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.भक्तवत्सलम हिन्दी का विरोध कर रहे छात्रों के सामने खड़े नज़र आ रहे है.वाइको का कहना है कि ये कार्टून लोगों की भावनाओं को आहत करता है और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है.वाइको के मुताबिक़ १९३०  से ही हिंदी के नाम पर गैर-हिंदी भाषियों के साथ भेदभाव किया जा रहा था जिसके खिलाफ तमिल विद्वानों ने यह आंदोलन चलाया था.हालांकि वो ये बताने में असमर्थ है कि गैर हिन्दी भाषियों के साथ ऐसा कौनसा भेदभाव किया जा रहा है और कौन कर रहा है ? 
भारत के राजनेता हर मुद्दे को लोगों की भावनाओं से जोडकर राजनीति का रंग देने में माहिर है. वाइको का ये आंदोलन

भी ऐसी ही एक कोशिश है.जिस तरह महाराष्ट्र में हिन्दी का विरोध करके राज ठाकरे अपनी ज़मीन बनाना चाहते है वो ही कोशिश ही इस मुद्दे को उठाकर वाइको तमिलनाडू में करने की कोशिश कर रहे है. उनकी पार्टी की तमिलनाडु में क्या स्थिति ये इससे ही समझा जा सकता है कि २०११ में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी सहयोगी पार्टियों ने उनकी पार्टी को एक भी सीट नहीं दी थी.लोकसभा में भी उनकी पार्टी के सांसदों की संख्या कभी भी दो अंकों में भी नहीं रही है. ज़ाहिर है वाइको ने सिर्फ अपनी दुकान चलाने के लिए ये मुद्दा उठाया है लेकिन वो ये नहीं जानते कि इतने वर्षों में तमिलनाडू के लोग हिन्दी विरोध के पीछे की राजनीति को भली भाँती समझ चुके है. वो ये जान गए है कि इस देश में हिन्दी कोई किसी पर न तो थोप रहा है और ना ही थोप सकता है और वो भी ये भी जान गए है कि हिन्दी लिखने,पढने  और बोलने में कोई बुराई नहीं है बल्कि ये भाषा उनके देश को समझने में सबसे ज़्यादा मददगार है.
-सुबोध

 


प्रकाशन दिनांक : 09-06-2012
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