हिंदी जगत

मौलिक शोध को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने की पहल

"यदि आप हिन्दी के कुछ नए विषयों पर शोध करना चाहते है और आपकी उम्र १८ से ३५ वर्ष के दायरे में है तो आपके लिए एक अच्छी खबर है. उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने इन विषयों पर हिन्दी में शोध के लिए फैलोशिप की घोषणा की है.लेकिन ये फैलोशिप सिर्फ दो विद्यार्थियों को ही दी जा सकेगी. "

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उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के निदेशक डॉ. सुधाकर अदीब ने पिछले दिनों संस्थान के इस निर्णय की घोषणा की. उन्होंने बताया कि पत्रकारिता, हिंदी में कंप्यूटरीकरण,फिल्मों में हिंदी, सृजनात्मक प्रशिक्षण, अनुवाद विज्ञान या कोश विज्ञान जैसे किसी विषय पर शोध करने वाले दो शोधार्थियों को फेलोशिप दी जाएगी.

इसके लिए विद्यार्थी को संस्थान द्वारा निर्धारित प्रारूप में आवेदन भेजना होगा. इसके साथ उन्हें एक हजार शब्दों में अपने प्रस्तावित अध्ययन क्षेत्र द्वारा हिंदी के विकास की योजना का खाका भी प्रस्तुत करना होगा. फेलोशिप के लिए चुने गए प्रत्येक शोधार्थी को संस्थान के द्वारा बीस हजार रुपये दिए जाएंगे तथा शोध पांडुलिपि का प्रकाशन भी कराया जाएगा. इसके बारे में और अधिक जानकारी संस्थान की इस वेबसाईट पर देखी जा सकती है.

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का ये निर्णय स्वागत योग्य तो है लेकिन शायद अधूरे मन से लिया गया है  यही कारण है कि शोध के लिए विषय तो आठ दी गए है लेकिन फैलोशिप सिर्फ दो विद्यार्थियों को दी जाएगी. दूसरी बात ये कि ये फैलोशिप वर्ष २०१२ -१३ के लिए है. अभी ये स्पष्ट नहीं है कि इसके बाद भी ये जारी रहेगी या नहीं ? बेहतर होगा यदि संस्थान निकट भविष्य में इनमे से हर विषय के लिए कम से कम एक फैलोशिप देने की घोषणा करे और इसे स्थायी बनाया जाए. उम्मीद है कि संस्थान ऐसा कुछ ज़रूर करेगा. 

 - सुबोध

 

 


प्रकाशन दिनांक : 05-06-2012
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