हिंदी जगत

बंगाल के अलावा अन्य गैर हिंदीभाषी प्रदेशों में हिन्दी ही बोलती हूँ - महाश्वेता देवी

"ज्ञानपीठ सम्मान से अलंकृत बांग्ला की वरिष्ठ साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी मानती है कि हिन्दी ही भारत को जोड़ सकती है. कोलकाता में हुए एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब मैं बंगाल के बाहर गैर हिंदीभाषी प्रदेशों में जाती हूँ तो हिन्दी से ही काम चलाती हूँ "

मौक़ा था कोलकाता में हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार राज मिठौलिया पर प्रकाशित अभिनंदन ग्रंथ के लोकार्पण का. रविवार जन अभिमत पत्रिका द्वारा आयोजित इस समारोह को संबोधित करते हुए बांग्ला की इस वरिष्ठ साहित्यकार ने हिन्दी की जी भर के सराहना की. उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न गैर हिंदी प्रांतों के लोग भी हिंदी बोलते और समझते हैं, लोगों को जोड़ने वाली इस भाषा की अनेकों खूबियां भी हैं, उन्हें इससे खासा लगाव है. उन्होंने बोलचाल में अधिक से अधिक हिन्दी भाषा का उपयोग करने की अपील भी की.इस अवसर पर ललित निबंधकार कृष्णबिहारी मिश्र भी उपस्थित थे. उन्होंने और महाश्वेता देवी  ने संयुक्त रूप से श्री राज मिठौलिया पर केंद्रित ग्रंथ का लोकार्पण किया.

ढाका में जन्मी और पश्चिमी बंगाल में पली और बड़ी और भारत के कोने-कोने की ख़ाक छान चुकी बांग्ला की आज के समय की सबसे बड़ी साहित्यिक शख्सियत यदि ये कहती है कि हिन्दी ही भारत को जोड़ सकती है तो उन सारे लोगों की आँखे खुल जाना चाहिए जो संपर्क भाषा के रूप में हिन्दी पर सवालिया निशान लगाने की कोशिश करते है.

समाचार स्रोत - जागरण


प्रकाशन दिनांक : 21-05-2012
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