हिंदी जगत

कलम आज उनकी जय बोल - सन्दर्भ विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस

"आज पूरे विश्व में प्रेस स्वतन्त्रता दिवस मनाया जा रहा है.कई साल पहले हिन्दी के प्रखर कवि दिनकर ने प्रेस की भूमिका पर एक कविता लिखी थी.संभवतः इस विषय पर किसी भी भाषा में लिखी गई ये सर्वश्रेष्ठ कविता है जो प्रेस को उसका दायित्व भी बताती है. "

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अभिव्यक्ति की आजादी हर कीमत पर हमेशा कायम रहना चाहिए इसमे कोइ दो राय हो हीनही सकती. पर इसके साथ-साथ  अब पूरे विश्व में इस बात पर भी चर्चा चल रही है कि प्रेस को इस आज़ादी का उपयोग किस तरह से करना चाहिए ? हिन्दी के समाचार माध्यम  इस आज़ादी का उपयोग कैसे कर रहे है इस पर बात करने की जगह  पढ़िए भारत के राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर की ये कविता, जो बताती है कि इस आज़ादी का उपयोग कैसे किया जाना चाहिए. 


जला अस्थियां बारी-बारी
चिटकाई जिनमें चिंगारी,

 जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर
लिए बिना गर्दन का मोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

जो अगणित लघु दीप हमारे
तूफानों में एक किनारे,
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन
मांगा नहीं स्नेह मुंह खोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

पीकर जिनकी लाल शिखाएं
उगल रही सौ लपट दिशाएं,
जिनके सिंहनाद से सहमी
धरती रही अभी तक डोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

अंधा चकाचौंध का मारा
क्या जाने इतिहास बेचारा,
साखी हैं उनकी महिमा के
सूर्य चन्द्र भूगोल खगोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

दिनकर जी इस कविता को हिन्दयुग्म ने स्वरबद्ध भी करवाया है.देश विदेश में रहने वाले युवा गीतकार और संगीतकारों ने अपने स्वर और सुरों से इस कविता में जान फूंक दी है. इसे ज़रूर सुनिए. ये एक अदभूत अनुभव होगा.  इस पृष्ठ पर ये कविता सुनी जा सकती है.

-सुबोध

 


प्रकाशन दिनांक : 03-05-2012
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