संसाधन खेती ,किसानी - पशुपालन

मिलिए केरल के एक अनूठे हिन्दी प्रेमी से

"केरल में रहने वाले एक बुजुर्ग किसान हिन्दी पढ़ तो लेते है मगर बहुत अच्छी ढंग से हिन्दी लिख नहीं पाते. अपनी हिन्दी सुधारने के लिए उन्होंने हिन्दी में एक चिट्ठा बनाया. इस अनूठे हिन्दी प्रेमी और हिन्दी सेवी व्यक्ति के इस चिट्ठे के माध्यम से आप रबर की खेती के बारे में भी जान सकते है. "

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मैं चन्द्रशेखरन नायर,केरल में तिरुवनन्तपुरम जिले का रहनेवाला 62 साल (उम्र) के पूर्व सैनिक हूँ. मैं एस.एस.एल.सी तक पढा लिखा हूँ. हिन्दी में अच्छी तरह लिख नहीं सकता तो भी मेरा कोशिश जारि रहेगा. ये पंक्तियाँ  चंद्रशेखरन जी  के हिन्दी चिट्ठे पर उनका परिचय देती है. इनके माध्यम से हिन्दी के प्रति उनका लगाव समझा जा सकता है.
उन्होंने सन २००७ में हिन्दी का चिट्ठा बनाया था. पहले सैनिक थे अब किसान है इसलिए इस चिट्ठे पर खेती बाडी की बात लिखना शुरू किया.दरअसल वे अपने इस चिट्ठे के  माध्यम से नई जानकारियाँ लोगों तक पहुंचाना चाहते
है.चंद्रशेखर जी हिन्दी पढ़ लेते है, लिख भी लेते है मगर बहुत अच्छी लिख नहीं पाते. कुछ गलतियाँ रह जाती है.६२ वर्ष की उम्र में भी वे पूरे उत्साह के साथ हिन्दी में लिखने की कोशिश कर रहे हैं. खेती-बाडी में आपकी रूचि न हो तो  भी उनके इस ब्लॉग को देखकर चन्द्रशेखरन जी का उत्साह ज़रूर बढ़ाएँ.


प्रकाशन दिनांक : 02-04-2012
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