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मालवी बोली में प्रकाशित होंगे महाकवि कालीदास के नाटक

"मालवी बोली की मिठास जल्द ही महाकवि कालिदास के नाटकों में भी घुल जाएगी. मध्यप्रदेश स्थित कालीदास अकादमी ने इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए है. अकादमी उनके तीन नाटक मालवी में प्रकाशित करने जा रही है. "

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मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान में बोली जाने वाली मालवी बोली के उत्थान की दिशा में समर्पित भाषा प्रेमी गुडी पडवा को मालवी दिवस के रूप में मनाते है. मालवी से अनुराग रखने वाले लोगों को इस मालवी दिवस के पूर्व उजैन स्थित कालीदास अकादमी ने एक अनुपम सौगात दी है. अकादमी के निदेशक प्रो. परमेश्वर नारायण शास्त्री एवं उप निदेशक शशिरंजन अकेला ने दैनिक भास्कर को बताया कि अकादमी अभिज्ञानशाकुंतलम्, मालविकाग्निमित्रम एवं विक्रमोर्वशीयम इन तीनों नाटकों को मालवी में प्रकाशित करने जा रही है.
प्रो शास्त्री ने कहा कि मालवी दिवस अर्थात २३ मार्च (गुडी पडवा )पर इनके प्रकाशन की विधिवत घोषणा की जाएगी.इन सभी नाटकों का मालवी में अनुवाद विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित ने किया है.मालवी भाषा में रूपांतरित इन नाटकों को मालवी प्रेमियों के लिए उज्जैन सहित अन्य शहरों में भी भेजे जाने की योजना है. इन पुस्तकों को प्रकाशित होने में करीब तीन माह का समय लग सकता है.


प्रकाशन दिनांक : 22-03-2012
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