विश्व में हिंदी

सूरीनाम - महिलाओं ने थामी हिन्दी की मशाल

"सूरीनाम में प्रवासी भारतीय महिलाओं और युवाओं ने हिन्दी की मशाल थाम ली है. पिछले दिनों यहाँ हुई हिन्दी परीक्षाओं में किशोर और युवा वर्ग ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. ख़ास बात ये है कि परीक्षार्थियों में ६५ प्रतिशत महिलाएं थी. परीक्षा देने वालों में से लगभग ९० फीसदी छात्र सफल हुए है.पिछले दिनों इन्हें प्रमाण-पत्र दिए गए.. ..पढ़िए सूरीनाम से भावना जी की रिपोर्ट "

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सूरीनाम में हिन्दी के लिए समर्पित संस्थाओं और व्यक्तियों के प्रयास अब रंग लाने लगे है. सूरीनाम हिन्दी परिषद द्वारा जनवरी२०१२ में आयोजित प्रथमा, मध्यमा, उत्तमा व प्रवेशिका परीक्षाओं के परिणाम ५ मार्च २०१२ को घोषित किए गए. परिणाम सुनकर यहाँ के हिन्दीसेवी, शिक्षक और विद्यार्थी सभी काफी उत्साहित थे. इस वर्ष इन परीक्षाओं में कुल ५९५ विद्यार्थियों ने भाग लिया जिनमें से ८८.२ % सफल रहे.सबसे खास बात ये है कि हिन्दी से जुडने के लिए युवाओं में काफी उत्साह था. ज़्यादातर प्रतिभागियों की औसत उम्र ११ से लेकर २० वर्ष थी. सबसे छोटा परीक्षार्थी सिर्फ ७ वर्ष का था तो सबसे बड़े परीक्षार्थी ६९ वर्ष के थे. इससे भी बड़ी बात ये है कि परीक्षार्थियों में ६५ प्रतिशत महिलाएं थी. ये ज़्यादा खुशी की बात है क्योंकि एक महिला के माध्यम से एक पूरा परिवार हिन्दी से जुडता है.

सूरीनाम हिन्दी परिषद द्वारा आयोजित एक समारोह में परिषद के सभापति माननीय श्री भोलानाथ नारायणजी ने इन परिणामों की घोषणा की.उन्होंने विद्यार्थियों को वितरित करने के लिए शिक्षकों को प्रमाण पत्र भी सौपे. सभी शिक्षकों को आत्मीय बधाई देते हुए उन्होने कहा न् सिर्फ परिषद बल्कि सूरीनाम के सभी हिन्दी भाषी लोग आपके प्रति आभारी है जो हिंदी शिक्षण के इ महान यज्ञ में निःस्वार्थ अपने परिश्रम व समय की आहूति डाल रहे हैं. इस अवसर पर परिषद की परीक्षा समिति के सचिव श्री जे. बरन, श्रीमती सुषमा खेदू और परिषद के सचिव श्री सत्यानंद परमसुख भी उपस्थित थे. श्री परमसुख ने परीक्षा की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की. इसकी एक प्रति भारतीय राजदूतावास की हिंदी व संस्कृति अधिकारी श्रीमती भावना सक्सैना को भी भेंट की गई.

उल्लेखनीय है कि सूरीनाम हिंदी परिषद पिछले तीस वर्षों से सूरीनाम में हिन्दी की परीक्षाएं आयोजित कर रहा है.परिषद से जुड़े सभी व्यक्ति, जिसमें परामर्श मण्डल के सदस्य, परीक्षा समिति के सदस्य, परीक्षाओं के दौरान निरीक्षण करने व परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करने वाले सभी अध्यापक अवैतनिक हैं और निःस्वार्थ भाव से और बड़ी लगन के साथ इस कार्य में जुटे हुए हैं.हिन्दी के विकास में यह योगदान अमूल्य है और इस कार्य से जुड़े सभी जन न् सिर्फ सूरीनाम बल्कि पूरे विश्व में फैले हिन्दी भाषी समाज की तरफ से बधाई व नमन के पात्र हैं.

 

योगदान : भावना सक्सैना
प्रकाशन दिनांक : 08-03-2012
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