विश्व में हिंदी

लोकसभा अध्यक्ष और भाजपा सांसद को जापान से मिली सराहना

"हिन्दी के प्रति आदर या अनुराग रखने वाले हर व्यक्ति और संस्था को एक काम ज़रूर करना चाहिए. यदि कही भी कोई भी व्यक्ति, समाज या संस्था हिन्दी के लिए कुछ अच्छा करें तो जी भरके उसकी सराहना करना चाहिए और यदि कोई हिन्दी का दमन करने की कोशिश करें तो उसे पूरी दृढता के साथ तर्कसंगत जवाब देना चाहिए.जापान में रहने वाले नौजवानों की एक संस्था ने कुछ ऐसा ही किया. "

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पिछले दिनों भारत की लोकसभा अध्यक्ष सुश्री मीरा कुमार ने सांसद हुकुमदेव नारायण यादव की याचिका पर संसद में हिन्दी के अनादर और अपमान से जुड़े एक मामले को विशेषाधिकार हनन समिति को सौंप दिया था. इसमें वित्त राज्यमंत्री को भी आरोपी बनाया गया था.

हिन्दी होम पेज पर प्रसारित इस समाचारभारत की लोकसभा अध्यक्ष ने हिंदी की उपेक्षा पर वित्तमंत्री को आरोपी बनाया  का  सन्दर्भ लेकर हिन्दी सभा जापान ने हिन्दी के अनादर के विरोध में आवाज उठाने के लिए श्री यादव  और उनकी पहल पर ये कदम उठाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष सुश्री मीरा कुमार की भरपूर सराहना  करते हुए  इस मामले को निष्कर्ष तक पहुंचाने और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कारवाई करने की मांग की है.दोनों नेताओं को लिखे पत्र में हिन्दी होम पेज का सन्दर्भ देते हुए हिन्दी सभा जापान के अध्यक्ष श्री रोहन अग्रवाल,

सचिव मुनीश शर्मा और संयोजक अखिलेश सुरजन ने  लिखा है कि - हिन्दी को उसका वास्तविक गौरव हासिल कराना, परदेश में बैठे हम भारतीयों का प्रण है.आपके स्तुत्य कृत्य की  सराहना करते हुए हम यही कहना चाहते है कि यदि देश के प्रत्येक नेता के हृदय में हिन्दी के लिए ऐसा ही अनुराग हो तो कोई भी शक्ति हमें परास्त नहीं कर सकती. हिन्दी सभा द्वारा इन दोनों नेताओं को प्रेषित पत्र यहाँ देखे जा सकते है..

विश्व में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा यानी हिन्दी से जुड़े लोग अपनी भाषा  से जुड़े मुद्दों और प्रश्नों पर उतने मुखर और प्रखर नहीं रहते जितना उन्हें होना चाहिए. हिन्दी को उसकी क्षमता और सामर्थ्य  के अनुरूप मान-सम्मान नहीं मिलने के अनेक कारणों में ये भी है .विश्व की कुछ और हिन्दी संस्थाओं के प्रतिनिधि और हिन्दी प्रेमी भी यदि इस मुद्दे पर इन दोनों नेताओं को इसी तरह का पत्र भेजे तो यकीनन इन्हें और भारत की संसद को भी हिन्दी की वैश्विक शक्ति का पता चलेगा, भरोसा होगा. इन्हें अपने काम पर गर्व भी होगा और इससे कई सांसदों को प्रेरणा भी मिलेगी.क्या कुछ और संस्थाएं ऐसा करेंगी ???

 


प्रकाशन दिनांक : 06-03-2012
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