हिंदी गौरव

प्रेम में डूबी कविताएं और गीत - देवल आशीष

"प्यार के बिना भी उम्र काट लेंगे आप, किन्तु कही तो अधूरी जिंदगानी रह जायेगी यानी रह जायेगी न मन में तरंग, नाही देह पर नेह की निशानी रह जायेगी "

deval ashish, hindi poetry, romantic poetry देवल आशीष, hindi kavitayen,प्रेम कविताएं

वसंत प्रेम की ऋतु है. वेलेंटाइन डे भी इसी ऋतु में आता है. वसंत के इस उत्सव में प्रस्तुत है श्री देवल आशीष के कुछ ऐसे ही अनुपम गीत और कविताएं जिन्हें सुनकर आपके मन के तार बज उठेंगे.उनके गीत और कविताएं सुनकर आप प्रेम की एक अनूठी दुनिया में खो जाएंगे...शुरुआत इससे करते है....

हमने तो बाजी प्यार की हारी ही नहीं है

जो चुके निशाना वो शिकारी ही नहीं है

 

ये भी सुनिए

मुखडा है जैसे पूर्णिमा के चन्द्रमा की छबि,

देहयष्टि जैसे पारिजात है कसम से

चंचल, हंसी में, मीठी तान किसी कोयल की

बानी में सुरों की बरसात है कसम से

 

और... और  अब सुनिए प्रेम के उत्सव के लिए एक अनूठी रचना. आज के दिन के लिए  इससे बेहतर कविता तलाशना शायद आपके लिए भी मुश्किल होगा.

 

लगती हो रात में प्रभात की किरण सी

किरण से कोमल कपास की छुअन सी

छुअन सी लगती हो किसी लोकगीत की

लोकगीत जिसमे बसी हो गंध प्रीत की

प्रीत को नमन एकबार कर लो प्रिये

एक बार जीवन में प्यार कर लो प्रिये

 


प्रकाशन दिनांक : 13-02-2012
print

नवीनतम लेख

a summer camp was organised for teaching hindi in minsk city of belarus by alesia.
BOOK WRITER, POEM, POET, SUBODH