हिंदी जगत

हिन्दी की उपेक्षा के विरोध में उठाई आशा जी ने आवाज

"हिंदी के दम पर अपार धन-दौलत,मान-सम्मान,यश और प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाले बड़े-बड़े लोग बड़े-बड़े मंचों पर अक्सर हिंदी की उपेक्षा करते है, मगर विख्यात गायिका आशा भोंसले ने दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम में हिंदी की उपेक्षा पर आयोजको को खूब फटकारा. "

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दिल्ली में लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स के भारतीय संगीत को समर्पित २३ वे संस्करण के लोकार्पण में आशाजी और सिद्ध लोक गायिका तीजनबाई सहित संगीत से जुडी और भी कई हस्तियाँ उपस्थित थी.आश्चर्य की बात ये है कि भारतीय संगीत पर केंद्रित ये पूरा कार्यक्रम अंग्रेजी में चल रहा था.जब उद्घोषक ने मंच पर तीजनबाई को बुलाया तो हिन्दी की उपेक्षा से दुखी होकर उन्होंने कह दिया कि - यहां का माहौल देखकर मैं डरी हुई हूं, क्योंकि मुझे अंग्रेजी बोलना नहीं आती.

तीजनबाई के बाद आशाजी को बोलने के लिए बुलाया गया. तीजनबाई की पीड़ा को सुनकर आशाजी के दिल का दर्द उनके शब्दों में उतर आया और उन्होंने आयोजको की जमकर खबर ली. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि - पहली बार ये पता चला कि दिल्ली में केवल अंग्रेजी ही बोली जाती है. मै अभी लन्दन से लौटी हूँ अगर वहां होती तो इसे माफ कर देती , लेकिन दिल्ली, यहां तो जिसे देखो, वही अंग्रेजी बोल रहा है-

आशाजी ने हिंदी की बात को बेहद दमदारी के साथ प्रस्तुत किया लेकिन आयोजकों की  चमड़ी इतनी मोटी थी कि उन्हें ज़रा भी शर्म नहीं आई. आशा जी की इस फटकार के बाद भी लिम्का की मूल कंपनी कोका कोला की ओर से कार्यक्रम का प्रस्तोता आशाजी से गाने की फरमाइश अंग्रेजी में ही कर बैठा. इस पर आशाजी ने तल्खी भरे स्वर में  कहा- आप ही की कंपनी का कोक पीया था, गला खराब हो गया है इसलिए नहीं गा सकती.

हिन्दी के लिए आवाज उठाकर आशाजी ने ये साबित कर दिया कि उनके मन में हिन्दी के प्रति गहरा सम्मान है. ये उम्मीद बहुत कम है कि सितारों की हैसियत रखने वाले भारत के कलाकार, गायक, गीतकार, संगीतकार, निर्माता, निर्देशक उनसे कुछ सीखेंगे पर हाँ ये विश्वास बहुत ज़्यादा है कि हिन्दी के प्रति प्रेम रखने वाले लोग इसके लिए  उनकी जी भरके सराहना करेंगे.

वेबदुनिया में प्रसारित श्री संदीप देव के समाचार पर आधारित


प्रकाशन दिनांक : 03-02-2012
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