हिंदी जगत

क्या गुजरात के लिए भारत विदेश है ??

"गुजरातियों के लिए हिंदी विदेशी भाषा है, गुजरात प्रांत में बोली जाने वाली उपभाषाओं में हिंदी को शामिल नहीं किया जा सकता.गुजरात के उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से हिंदी में जारी एक विज्ञापन पर आपत्ति जताते हुए यह टिप्पणी की है.न्यायालय का पूर्ण सम्मान करते हुए कुछ प्रश्न मन में उठ रहें है, संविधान विशेषज्ञ एवं विधिवेत्ताओं से अनुरोध है कि वे इनका उत्तर दे ताकि मन को संतोष मिल सके. "

नए साल की सुबह जागरण के वेब संस्करण पर ये समाचार देखने कों मिला. समाचार कहता है कि नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को दक्षिण गुजरात में एक सड़क के विस्तार के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण करना था ,इस योजना से प्रभावित किसानों ने इसका विरोध करते हुए हाई कोर्ट में चुनौती दी जिसमें उन्होंने कहा कि इसके लिए गुजराती समाचार पत्रों में भी हिंदी में विज्ञापन जारी किया गया जबकि उन्हें यह भाषा आती ही नहीं है.

इस मामले की सुनवाई करने के बाद मान. न्यायमूर्ति श्री वी एम सहाय ने अपने फैसले में कहा कि हिंदी भी गुजरातियों के लिए तो विदेशी भाषा की तरह है. गुजरात में शुरुआत से ही बच्चों की गुजराती में शिक्षा दी जाती है व मातृभाषा के साथ राजकीय उपयोग में भी गुजराती भाषा का ही प्रयोग होता है, इसलिए हिंदी को गुजराती वर्नाकूलर भाषा भी नहीं माना जा सकता.ये फैसला अंग्रेजी में दिया गया था.

न्यायालय के फैसले पर टिप्पणी करना उचित नही है मगर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संवैधानिक अधिकार मन में उठ रहे सवाल और जिज्ञासाओं कों इस उद्देश्य से व्यक्त करने का अधिकार  देता है कि इन्हें पढकर कोई विशिष्ट योग्यता प्राप्त वैधानिक सलाहकार अथवा संविधान विशेषज्ञ इनका समाधान कर सके जिससे मेरी तथा अन्य सामान्य समझ रखने वाले लोगो की समझ का दायरा भी बढ़ सके. मेरी विनम्र जिज्ञासा है कि एक सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य का संविधान जिन भाषाओं कों मान्यता देता है क्या उनमे से एक भाषा उसके किसी एक राज्य के लिए विदेशी भाषा हो सकती है?सवाल ये है कि गुजरातियों के लिए हिंदी विदेशी भाषा है तो क्या जहां के लोग हिन्दी भाषी है और जहाँ--जहाँ  हिन्दी बोली जाती है ऐसा हर स्थान गुजरातियों के लिए विदेश है ? हिन्दी में लिखा विज्ञापन न समझने वाले ग्रामीण क्या अंग्रेजी में लिखा फैसला समझ सकते है? मेरे मन में सवाल ये भी उठ रहा है कि किसी भी भाषा कों किसी देश में  विदेशी भाषा कब माना जाता है और इसका पैमाना क्या है? संविधान विशेषज्ञ, विधिवेत्ता, अधिवक्ता और देश के विधि-विधान के सभी विशेषज्ञों से मेरा आग्रह है कि कृपया वे इन प्रश्नों का उत्तर दे ताकि मेरे मन कों तसल्ली मिल सके.

- सुबोध खंडेलवाल


प्रकाशन दिनांक : 02-01-2012
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