विश्व में हिंदी

हिन्दी की क्षमता को पहचान रहे है विदेशी नागरिक – डॉ. वैंडी फ्रीमैन

"हिंदी भाषा में बहुत क्षमता है इसलिए विदेशी नागरिकों में हिंदी सीखने की बहुत ललक है.ये कहना है अमेरिका के राइस विश्वविद्यालय के भाषा अध्ययन केंद्र की निदेशक डॉ. वैंडी फ्रीमैन का.चंडीगढ में हुए एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इस बार उनके विश्वविद्यालय के हिंदी पाठ्यक्रम सारी सीटें पहले ही दिन भर गईं थी. "

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हिंदी भाषा में बहुत क्षमता है इसलिए विदेशी नागरिकों में हिंदी भाषा सीखने की बड़ी ललक है. कहना है ये विचार अमेरिका के राइस विश्वविद्यालय के भाषा अध्ययन केंद्र की निदेशक डॉ. वैंडी फ्रीमैन का. चंडीगढ  की संस्था सृजन द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि इस बार उनके विश्वविद्यालय के हिंदी पाठ्यक्रम सारी सीटें पहले ही दिन भर गईं

चंडीगढ की संस्था सृजन के सहयोग से आयोजित इस साहित्यिक समारोह में डॉ. वैंडी फ्रीमैन के साथ-साथ राइस विश्वविद्यालय में हिन्दी की विभागाध्यक्ष डॉ. सरिता मेहता भी उपस्थित थी.उल्लेखनीय है वे मूल रूप से 

चंडीगढ की ही निवासी है.लेखिका, कवियत्री और प्राध्यापक के साथ-साथ सरिताजी बहुत अच्छी कलाकार भी है.विदेशियों को हिन्दी सिखाने के लिए उनकी दो किताबें आओ हिन्दी सीखे  तथा लेट अस लर्न हिन्दी काफी लोकप्रिय है. हिन्दी के प्रसार में उल्लेखनीय योगदान के लिए सृजन के अध्यक्ष डॉ. डीएस गुप्त ने डॉ.फ्रीमैन तथा डॉ. मेहता का सम्मान किया.कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डा. मेहता ने कहा कि अगले में चंडीगढ़ में हिंदी कार्यशाला आयोजित की जायेगी, जिसमें लगभग 20 विदेशी विद्यार्थी भागीदारी करेंगे.

डॉ. फ्रीमैन ने सच ही कहा. हिन्दी विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा है. उसमे अपार क्षमताएं है और विदेशी लोग इन क्षमताओं को पहचानने लगे है लेकिन लाख टके का सवाल ये है कि भारतीय लोग इसे कब पहचानेंगे ??

 


प्रकाशन दिनांक : 15-12-2011
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