हिंदी गौरव

राह पकड़ तू एक चला चल .... पा जाएगा मधुशाला

"मिट्टी का तन, मस्ती का मन,क्षण भर जीवन मेरा परिचय.............. इन पंक्तियों से अपना परिचय देने वाले हिन्दी के महाकवि डा. हरिवंश राय बच्चन की आज (२७ नवंबर ) जन्मतिथि है.सन १९३३ या ३५ में बह्चन साहब ने पहली बार मधुशाला का पाठ किया था और तब से अब तक उनकी ये मधुशाला अविराम चल रही है. "

madhushala, dr. harivansh rai bachchan, manna de,

मैं दीवानों का वेश लिए फिरता हूँ 
मैं मादकता निःशेष लिए फिरता हूँ
जिसको सुनकर जग झूम,झुके लहराए,
मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूँ...

 

उमर खैयाम की रुबाइयों पर आधारित मधुशाला लिखने वाले इस महाकवि के बारे में आपने बहुत पढ़ा होगा सुना भी होगा लेकिन  बच्चन की मधुशाला भी तासीर भी साकी के प्याले की तरह है उसे कितना भी सुनो, मगर मन नहीं भरता. जिन लोगों ने खुद बच्चन साहब के मुंह से मधुशाला सुनी  है वो मानते है कि मशहूर संगीतकार जयदेव और प्रख्यात गायक मन्ना डे की जोडी ने मधुशाला के स्वरों को कुछ वैसी ही रंगत दी है.

अपने भीतर अध्यात्म और दर्शन के गहरे सन्देश को छुपाकर मस्ती का सन्देश देने वाली इस अनुपम कविता को आप मन्ना डे की आवाज में यहाँ सुन सकते है. मधुशाला के ये प्याले श्री रोहित शर्मा के यू ट्यूब संग्रह से लिए गए है.

 

दूसरा भागतीसरा भागचौथा भाग

अमिताभ की सम्मोहक आवाज में मधुशाला की कुछ रुबाईयां यहाँ सुनी जा सकती है.

 


प्रकाशन दिनांक : 26-11-2011
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