हिंदी जगत

कांग्रेसी नेताओं ने अपने प्रवक्ताओं से कहा - अंग्रेजी छोडो हिन्दी में बोलो

"देश के कई राज्यों के कांग्रेसी नेताओं ने अपनी ही पार्टी प्रवक्ताओं के अंग्रेजी प्रेम पर तीखे सवाल खड़े किए है.दिल्ली में पत्रकारों से चर्चा में कई नेताओं ने कहा कि कांग्रेस प्रवक्ताओं कें अंग्रेजी प्रेम के चलते देश के अधिसंख्य लोगों तक पार्टी का पक्ष सही तरीके से नहीं पहुँच पा रहा है. "

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राजनीति के राष्ट्रीय परिदृश्य पर अपनी बात पहुंचाने के लिए हिन्दी कितनी आवश्यक है ये बात किसी से छिपी नहीं है. दक्षिण के कई नेता पूरे भारत में अपनी स्वीकार्यता बनाने के लिए हिन्दी सीख रहे है.हाल ही में कोयम्बटूर में हुए नगर निगम के चुनाव में एक वार्ड में सभी पार्टी के प्रत्याशियों को प्रचार के लिए हिन्दी का सहारा लेना पढ़ा था.थ्री जी मामले में तिहाड की शोभा बढ़ा रहे है ए. राजा वहाँ के एक और मेहमान पूर्व पुलिस आयुक्त एस.एस. राठी से हिन्दी सीख रहे है , लेकिन कांग्रेस के तीनों राष्ट्रीय प्रवक्ता अंग्रेजी के मोहजाल में बंधे हुए है ये आरोप किसी विपक्षी दल के नेता ने नहीं लगाए बल्कि कांग्रेस के ही कई नेताओं ने ये बात उठाई है.

इंडिया टूडे समूह के उपक्रम मेल टूडे में प्रकाशित खबर ये बताती है कि उत्तरप्रदेश,उत्तराखंड, पंजाब,हिमाचल,राजस्थान और मध्यप्रदेश के कई कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि पार्टी के तीनों प्रवक्ता -श्री अभिषेक मनु संघवी,श्रीमती  रेणुका  चौधरी और मनीष तिवारी- ज़्यादातर मौकों पर अपनी बात अंग्रेजी में करते है जिस कारण देश के अधिसंख्य लोगों तक उनकी बात नहीं पहुँच पाती. इन नेताओं ने कहा कि भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन और राजीव प्रताप रुडी अक्सर हिन्दी में बोलते है इसलिए उनकी बात ज़्यादा लोगों तक पहुँचती है. इन नेताओं ने अपने प्रवक्ताओं से भी हिन्दी को महत्त्व देने की बात कही है.

शायद अब ये तीनों हाई प्रोफाइल नेता हिन्दी का महत्त्व समझ जाएं???  वैसे इन्हें यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी से पहले ही ये सीख ले लेनी चाहिए थी. सक्रिय राजनीति में उतरने के तुरंत बाद उन्होंने हिन्दी में बोलना शुरू कर दिया था. 

खबर स्रोत - इंडिया टूडे


प्रकाशन दिनांक : 02-11-2011
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