हिंदी जगत

हिन्दी कविताओं पर एक उत्सवी संगोष्ठी

"कॉलेजो में होने वाली गोष्ठियां और सेमिनार आमतौर पर बड़े नीरस होते है.उनमें रचनात्मकता कम और किताबी बाते ज़्यादा होती है मगर दिल्ली के सत्यवती कॉलेज में हिन्दी कविताओं पर एक उत्सवी संगोष्ठी हुई.इसमें वैचारिक चिंतन के साथ साथ रचनात्मकता भी नज़र आई.इस संगोष्ठी में कविताओं को इस ढंग से पेश किया गया कि फ़िल्मी गानों को भूलकर विद्यार्थी इन कविताओं में खो गए."

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सत्यवती कॉलेज  की कला और सस्कृति परिषद -उत्कर्ष द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रोफ़ेसर कर्ण सिंह चौहान ने की. हिन्दी की समकालीन युवा कविता विषय पर हुई इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों के 20 युवा कवियों के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजो के 150 प्राध्यापक और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया. कई मायनों में यह एक अलग तरह का और आयोजन था. दो सत्रों में हुए इस काव्य महोत्सव में युवा कवियों ने लेखन के अपने अनुभव, अपनी रचना प्रक्रिया, आज के दौर में  कविता की भूमिका और उसकी चुनौतियों पर बात की और इनके बीच सभी प्रतिभागियों ने कुछ चुनी हुई कविताओं की संगीतमय और नाट्य प्रस्तुति का आनंद भी लिया.

पहले सत्र में अनुज लुगुन, अरुण देव,अमित कुमार,संध्या नवोदिता,मुकुल सरल, ओमलता, मजरी श्रीवास्तव, आदि ने आपने काव्यलेखन के अनुभव पर अपनी बात रखी और अपनी कविताओं का पाठ किया.दूसरे सत्र में अशोक पांडे, गिरिराज किराड़ू, रजनी अनुरागी, पूनम तुषामड़, रमेश बर्णवाल, रेणु हुसैन, सईद अयूब कवियों ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत कर कविताएं पढ़ी.

संगोष्ठी को उत्सव में बदलने का श्रेय इसी कॉलेज के संगीत समूह राईजिंग फायर और युवा अभिनेता और  नाटककार विजय सिंह को जाता है. शिवानी चतुर्वेदी और पंकज भारती के निर्देशन में राईजिंग फायर के सदस्यों ने रघुवीर सहाय और कुंवर नारायण की कविताओं को इस ढंग से पेश किया कि लोग झूम उठे और इसके बाद मुक्तिबोध की तीन कविताओं का नाटकीय वाचन कर विजय सिंह दर्शकों को एक दूसरी ही दुनिया में ले गए. श्रोताओं के प्रतिसाद से अभिभूत पंकज ने इसका पूरा श्रेय उत्कर्ष के संयोजक श्री मुकेश मानस को दिया.कार्यक्रम  का संचालन डा.राजेश चौहान और डा. विदित अहलावत ने किया.

इस अवसर पर चर्चित कवि श्री मिथिलेश श्रीवास्तव को उत्कर्ष की तरफ़ से कविता मित्र सम्मान से अलंकृत भी किया गया. श्री मुकेश मानस ने बताया कि जल्दी ही विश्वभर के हिन्दी प्रेमी इंटरनेट के माध्यम से राइजिंग फायर की इन प्रस्तुतियों से रूबरू हो सकेंगे.


प्रकाशन दिनांक : 31-10-2011
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