हिंदी जगत

बांग्लादेश ने हिन्दी फिल्मों पर लगी रोक हटाई

"बांग्लादेश के लोग भी अब सिनेमाघरों में जाकर हिन्दी और बांग्ला फ़िल्में देख सकेंगे.बांग्लादेश की सरकार ने चार दशक पहले भारतीय फिल्मों पर लगाई पाबंदी हटा ली है. वहां की एक संस्था ने 12 भारतीय फिल्में बुलवाई है जिनमें से बांग्ला की तीन और हिंदी की नौ फिल्में हैं.बालीवुड के लिए ये बड़ी खबर नहीं है हिन्दी फिल्मों के लिए बांग्लादेश का बाज़ार बहुत छोटा है लेकिन भाषा में रूचि रखने वालों के लिए निःसंदेह ये एक सकारात्मक समाचार है. "

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1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) और पश्चिमी पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों पर पाबंदी लगा दी थी. 1971 में  पूर्वी पाकिस्तान आज़ाद होकर बांग्लादेश बन गया, लेकिन अगले ही साल यहाँ की सरकार ने स्थानीय फिल्म इंडस्ट्री के दबाव में भारत समेत दक्षिण एशिया को सभी देशों की फिल्मों के आयात पर पाबंदी लगा दी.

इसके पीछे तर्क ये दिया गया कि बांग्लादेश की फिल्मों के विकास के लिए बाहरी फिल्मों पर रोक ज़रुरी है, लेकिन इसका असर एकदम विपरीत हुआ. प्रतियोगिता के अभाव में यहाँ का फिल्म उद्योग पिछडता गया. सिनेमाघरों के मालिकों के दबाव और अपील के बाद पिछले साल यह पाबंदी हटी, लेकिन कुछ समय बाद ही फिर से  पाबंदी लगा दी गई.

एक अंतराल के बाद अब ये रोक हटी है और 12 फिल्में आयात की गई हैं.इनमें बांग्ला भाषा में बनी जोर, बदला और संग्राम हैं.हिंदी फिल्मों की सूची में शोले, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, दिल तो पागल है, कुछ कुछ होता है, कभी खुशी कभी गम, धूम-2, डॉन (नई), वांटेड और 3 इडियट्स शामिल हैं.

अपने-आप में यह शुभ खबर है. जाने-अनजाने में हिन्दी फिल्मों ने हिन्दी कों दुनिया के हर कोने तक पहुंचाने में बहुत ही महतवपूर्ण भूमिका निभाई है उम्मीद है कि बांग्लादेश में भी भारतीय फिल्मों से हिन्दी के लिए सकारात्मक वातावरण बनेगा.

साभार - श्री अजय ब्रह्मात्मज

समाचार स्रोत - जागरण याहू


प्रकाशन दिनांक : 17-08-2011
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