विश्व में हिंदी

दस दिवसीय कार्यक्रम ने दी सूरीनाम में हिंदी शिक्षण को नई ऊर्जा

"सूरीनाम में हिंदी शिक्षण को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से भारत के राजदूतावास के सहयोग से सूरीनाम साहित्य मित्र संस्था ने एक रचनात्मक पहल की.इसके तहत राजदूतावास की हिंदी अधिकारी श्रीमती सक्सैना के निर्देशन में सूरीनाम के विभिन्न शहरों में दस दिनों तक कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें यहाँ के सैकड़ों हिंदी प्रेमियों ने खूब उत्साह से भाग लिया. प्रस्तुत है सूरीनाम के इस हिंदी उत्सव की पहली रिपोर्ट."

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सूरीनाम में हिंदी शिक्षण को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से सूरीनाम साहित्य मित्र संस्था के अनुरोध पर भारतीय दूतावास ने भारत के सुप्रसिद्ध भाषाविद, हिंदी विद्वान और कोषकार डॉ॰ विमलेश कांति वर्मा को सूरीनाम आमंत्रित किया. उनकी विशेषज्ञता का लाभ लेने हेतु राजदूतावास की हिंदी अधिकारी श्रीमती भावना सक्सैना ने हिन्दी शिक्षकों के लिए दस दिवसीय कार्यक्रम तैयार किया.

इसके तहत सूरीनाम के अलग-अलग शहरों में हिन्दी की कार्यशालाएं आयोजित की गई. इस दक्षिण अमेरिकी देश में यूं तो हिन्दी से जुड़े कार्यक्रम निरंतर होते है किन्तु हिंदी की पढ़ाई को बेहतर बनाने के तरीकों पर कार्यशाला पहली बारहो रही थी इसलिए सभी जगह प्रतिभागी काफी उत्साहित थे.खासतौर पर विद्यार्थियों का उत्साह इतना ज्यादा था कि कि कई स्थानों पर दो घंटे की निर्धारित अवधि के स्थान पर कार्यशालाएँ चार-चार घंटे तक चलती रही और निकेरी नामक जिले में तो प्रतिभागियों की संख्या बढ़ने के कारण एक की जगह दो कार्यशालाएं लगानी पड़ी.

निकेरी के साथ-साथ वानिका, पारामारीबो, सरमक्का और कौमवेना नामक जिलों में भी लोगों ने बड़े उत्साह के साथ इसमें भाग लिया. कार्यशालाओं को संबोधित करते हुए डा. वर्मा ने हिंदी के व्याकरण, उच्चारण और वर्तनी पर चर्चा की और इसकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने वर्णक्रम और शब्दकोष तथा सन्दर्भ ग्रंथों को देखने की पद्धति भी समझाई. भाषा की बारीकियों व शब्दों के चयन को उदाहरण देकर समझाया गया यथा -तुम आना, तुम भी आना, तुम ही आना, इन तीनों का अर्थ और इनका अंतर इके माध्यम से हिन्दी की विशेषताएं समझाई गई. इस दौरान हिंदी की पढ़ाई को और अधिक रुचिकर बनाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग हिंदी से जुड़ सकें.

योगदान : भावना सक्सैना
प्रकाशन दिनांक : 12-08-2011
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