हिंदी जगत

अंग्रेजी वर्णमाला को भारतीयता में ढाल रहें है अमृतसर के एक बुजुर्ग

"अमृतसर में रहने वाले ८१ वर्षीय बुजुर्ग धर्मपाल मेहरा एक ऐसे रचनात्मक काम में लगे है जिससे अंग्रेजी पढने वाले बच्चे भी भारतीय संस्कारों के रंग में रंग सकेंगे.मूल रूप से कपड़ों के व्यापारी मेहरा साहब अंग्रेजी की वर्णमाला में एप्पल, बाल और केट जैसे उदाहरण हटाकर अर्जुन,भागवत गीता और चाणक्य जैसे उदाहरण जोड रहे है. वहाँ के एक स्कूल ने उनके इस प्रयास को अपना भी लिया है. "

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‘ए’ से एप्पल, ‘बी’ से बॉय और ‘सी’ से कैट..,  अंग्रेजी की वर्णमाला में अब ये उदाहरण नहीं चलेंगे. इसकी जगह अब बच्चे ‘ए’ से अर्जुन,अभिमन्यु और  अशोक, ‘बी’ से  भाई बालमुकुंद, भगवत गीता और ‘सी’ से चंद्रगुप्त व चाणक्य के नाम का उच्चारण करेंगे.  अंग्रेजी की वर्णमाला को अब भारतीयता का जामा पहनाया जा रहा है और इसे अमृतसर के डीएवी  स्कूल में मौखिक तौर पर लागू भी  कर दिया गया है.

अमृतसर में रहने वाले ८१  वर्षीय धर्मपाल मेहरा  ने सालों की मेहनत के बाद अग्रेजी वर्णमाला के २२ अक्षरों को भारत के रंग में रंग दिया है.उनकी इस अनोखी पहल में डी से दयानंद, दुर्गा, ई से एकलव्य, जी से गुरु नानक देव जी, के से कृष्ण, एल से लक्ष्मण, एम से महाराणा प्रताप, महाराजा विक्रमादित्य, महाराजा रणजीत सिंह, आर से राम, छ से छत्रपति शिवा जी आदि हैं. बाकि बचे ४ वर्ण भी जल्दी ही  भारतीय हो जाएंगे. 

हिन्दी  के उपासक मेहरा साहब इस बात से इनकार करते है कि उनके इस काम से अंग्रेजी का प्रचार होगा, वे कहते है कि अंग्रेजी वर्णमाला में भारतीय उदाहरण जोडने से अंग्रेजी का प्रचार नहीं होगा बल्कि इसके माध्यम से  भारतीय जीवन शैली, शौर्य, पराक्रम, संस्कार और अध्यात्मिक परम्पराएं उस पीढ़ी तक पहुंच सकेंगी जो अंग्रेजी माध्यम से पढ़ रही है और इससे उनके मन में अपना देश, संस्कृति और भाषा के प्रति सम्मान जगेगा.

श्री मेहरा अपनी इस विचारधारा को स्कूलों के माध्यम से प्रचारित कर रहे हैं. उनकी नई शब्दावली हाथी गेट स्थित डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के नर्सरी व प्री-नर्सरी के टीचर मौखिक रूप से पढ़ा रहे हैं.। मेहरा जल्द ही इसकी सचित्र पुस्तक उपलब्ध कराने की तैयारी में हैं। चार अक्षरों पर तलाश है जारी मेहरा की वर्णमाला में चार अक्षरों पर तलाश अभी तक जारी है। उनमें क्यू, डब्ल्यू, एक्स व जेड शामिल हैं.

स्रोत - दैनिक भास्कर. कोंम

योगदान : शिवराज जी
प्रकाशन दिनांक : 02-08-2011
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