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मैं तो पानी हूँ

"राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है । "

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नमन करूँ मैं इस धरती माँ को,
 
जिसने मुझको आधार दिया,
 
पल पल मर कर जीने का
 
सपना ये साकार किया !
 
हिम शिखर के चरणों से मैं,
 
दुःख मिटाने निकला था,
 
किसी ने रोका मुझे भंवर में,
 
कोई प्यासा दूर खड़ा था !
 
कभी आँखों से टपका मैं,
 
कभी बादल बनकर बरसा हूँ,
 
कभी सिमट कर इस माटी में,
 
नदी नालों में बहता हूँ !
 
कब कहाँ किसके काम आऊँ,
 
मैं कहाँ इतना ज्ञानी हूँ,
 
सब के तन मिटे इस माटी में,
 
मैं तो फिर भी पानी हूँ !
 
– रचना – राजेन्द्र सिंह कुँवर ‘फरियादी’
 
 
 
योगदान : राजेन्द्र सिंह कुँ
प्रकाशन दिनांक : 05-04-2016
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