हिंदी जगत

हिन्दी न जानने के कारण ही खुद को प्रधानमंत्री के पद से अलग किया था प्रणव दा ने

"कल भोपाल में अटलजी के नाम पर स्थापित हिन्दी विश्वविद्यालय के स्थापना समारोह में भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने हिन्दी में अपना भाषण दिया. बंगाल के भद्र पुरुष के रूप में विख्यात प्रणव दा प्रधानमंत्री पद का प्रबल दावेदार माने जाते थे मगर आपको ये जानकर हैरानी होगी कि हिन्दी न जानने के कारण ही उन्होंने खुद को इस पद से अलग कर लिया था. "

pranav mukharji hindi No Hindi, no PM, says Pranab Mukherjee

प्रणव दा को भारत की केंद्र सरकार का संकट मोचक माना जाता था. संसद के भीतर या बाहर कोई भी समस्या होने पर सत्तारूढ़ दल का शीर्ष नेतृत्व उन्हें ही आगे करता था. सयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के पहले चरण की सरकार में तो मंत्रियों के समूह की चालीस से भी ज़्यादा बैठकों की अध्यक्षता उन्होंने ही की थी. वे संगठन और सरकार दोनों जगह सबसे वरिष्ठ भी थे और अनुभवी भी.यहाँ तक कि वर्त्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी एक समय उनके अधीन रह चुके है.उस समय श्री सिंह रिजर्व बैंक के गवर्नर थे और प्रणव दा भारतके वित्तमंत्री, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री पद से अलग कर लिया था.
खुद प्रणव दा ने इसका खुलासा सन २००९ में एक टीवी चैनल से चर्चा में किया था. उन्होंने कहा था कि नरसिम्हाराव जी अच्छी प्रधानमंत्री इसलिए साबित हुए क्योंकि उनकी सम्प्रेषण क्षमता काफी अच्छी थी और वे बहुत अच्छी हिन्दी भी जानते थे.ये दोनों बाते बेहद आवश्यक है. यदि आप हिन्दी नहीं जानते तो आप भारत के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते है. चूंकि मै हिन्दी नहीं जानता इसलिए मेरे मन में प्रधानमंत्री पद की कोई लालसा नहीं है.
सन्दर्भ - जी न्यूज़


प्रकाशन दिनांक : 07-06-2013
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