संसाधन हिन्दी आलेख

क्या सिर्फ कानून बना देने से अपराध रुक जायेंगे ?

"हमारे देश और समाज में एक अजीब सी प्रवृत्ति बढती जा रही है. ये प्रवृत्ति हर समस्या का हल क़ानून में ढूँढती है और कोई भी नई समस्या आने पर एक नया क़ानून बनाने की बात शुरू हो जाती है. सवाल ये है कि क्या क़ानून बनाने से सारी समस्याएं हल सो सकती है ? पढ़िए श्री प्रहलाद व्यास का एक लेख "

क़ानून समाज प्रहलाद व्यास हिन्दी लेख दामिनी अन्ना हजारे
भ्रष्टाचार हमारे देश को दीमक की तरह खोखला करता जा रहा है. किसी भी सरकारी विभाग में यहाँ तक कि अदालत में भी बिना लिए दिए आम आदमी का कोई काम नहीं होता. भारत का हर आदमी इस महामारी से पीड़ित है भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अन्ना हजारे लोकपाल क़ानून की मांग कर रहे है.
दिल्ली में  कुछ दरिंदों ने चलती बस में इंसानियत को तार-तार कर दिया और सरकार ने इस तरह की दरिंदगी करने वालों के खिलाफ एक नया क़ानून बना दिया.
आज हर समस्या के समाधान के लिये आज कानून बनाये जा रहे है या बनाने की मांग की जा रही है, परन्तु समाज की कई समस्याओं का समाधान सिर्फ कानून के माध्यम से संभव नहीं है. जैसे समाज मे गिरते हुए नैतिक मूल्य इसके परिणामस्वरूप आज समाज में ईमान, इंसाफ, ईज्जत, विश्वास, भावनाएं इन सब मुद्दो पर समाज में कोई व्यक्ति गंभीर नहीं है. मुनाफाखोर अर्थव्यवस्था में आज समाज का प्रत्येक व्यक्ति घाटे का सौदा नहीं करना चाहता है चाहे घर-परिवार, जाति-समाज, धर्म व आध्यात्मिकता इन सभी क्षेत्रों में आदमी का दृष्टिकोण हो गया कि उसे वही काम करना चाहिए जिसमें फायदा हो. 
इस मुनाफ़ाखोर व्यवस्था में ईमानदारी और नैतिकता ताक पर रख दी गई है. आज जो कानून बन रहे है वह पूरी
तरह जनता को राहत देने वाले नहीं भी है और कई कानूनो से समाज में विद्वेष भी पैदा हो रहा है. हिन्दुस्तान के कई कानून तो आदमी को अनैतिक आचरण करने के लिए न केवल विवश करता है बल्कि उसे प्रोत्साहित भी करता है इसलिए दुनिया को अपराध मुक्त करने के लिए कानून को हथियार व ढ़ाल के रूप में इस्तेमाल न करें केवल औजार के रूप में इस्तेमाल करे ताकि समाज में आ रही चुनौतियों का आप बेहतरीन ढंग से समाधान निकाल सके.
 
योगदान : Prahlad Rai Vyas
प्रकाशन दिनांक : 04-04-2013
print

नवीनतम लेख

a summer camp was organised for teaching hindi in minsk city of belarus by alesia.
BOOK WRITER, POEM, POET, SUBODH