हिंदी जगत

हिंदी फ़िल्मों की दीवानगी...

"फिल्मों के रथ पर सवार होकर हिंदी चारों दिशाओं में फैल रही है. हिंदी के विकास,विस्तार और प्रचार में अनजाने में ही बालीवुड ने जितना योगदान दिया है उसकी तुलना दूसरे किसी भी माध्यम से नहीं की जा सकती. हिंदी फ़िल्में भारत के भीतर और बाहर लोगों को हिंदी से जोडने का काम कर रही है."

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फिल्मों के माध्यम से हिंदी भारत के उन क्षेत्रों में भी अपनी जगह बना रही है जहां पहले राजनीति के चलते उसके लिए सारे रास्ते बंद थे. ऐसे कुछ क्षेत्रों में हिंदी फिल्मों ने हिंदी को इतनी रचनात्मकता के साथ स्थापित किया है कि हिंदी भाषी क्षेत्रों को पीछे छोड दिया है.इसकी ताज़ा मिसाल मालाबार क्रिश्चियन कालेज में देखी जा सकती है.

शैक्षणिक स्तर के लिए मलाबार कॉलेज सिर्फ केरल नहीं बल्कि पूरे दक्षिण भारत में विख्यात है और इसकी ख्याति का एक और कारण यहाँ की  फ़िल्म लाइब्रेरी और हिंदी फ़िल्म क्लब भी है.ये शायद भारत का एकमात्र  कॉलेज है, जहां हिंदी फ़िल्म लाइब्रेरी है. इस लाइब्रेरी में फ़िल्मों की सीडी और डीवीडी के साथ-साथ फिल्मों पर आधारित पुस्तकों तथा  कई फ़िल्मों की स्क्रिप्ट भी संग्रहित है.

जनवरी २०१० में शुरू हुई इस फ़िल्म लाइब्रेरी में हिंदी की सैकड़ों फ़िल्में है. इनमें वी. शांताराम, राजकपूर, श्याम बेनेगल, मृणाल सेन जैसे निर्माता निर्देशकों के साथ-साथ करण जोहर, यश चोपड़ा और संजय लीला भंसाली जैसे निर्देशकों की फ़िल्में भी हैं.

कॉलेज के प्रवक्ता बताते है कि इस लाइब्रेरी की स्थापना हिंदी भाषा के प्रसार के लिए की गई थी. विद्यार्थी इसमें काफी रूचि ले रहें है. वे बताते है कि लाईब्रेरी में हर सप्ताह नई और पुरानी फ़िल्मों की स्क्रीनिंग की जाती है.समय-समय पर फ़िल्म फेस्टीवल  भी आयोजित किया जाता है जिसमें छात्रों को हिंदी फ़िल्मों के नामचीन कलाकारों और निर्देशकों से मिलने का अवसर भी मिलता है.

विदेशों में  कई संस्थान हिन्दी सिखाने के लिए फिल्मों का सहारा लेते है मगर भारत में शायद पहली बार किसी कॉलेज ने ऐसी पहल की है. मालाबार कॉलेज का ये प्रयास वाकई अनूठा, रचनात्मक और प्रशंसनीय है. इस बारें में आप क्या सोचते है क्या आपको लगता है कि भारत में हिन्दी के लिए काम कर रही संस्थाओं को भी इस तरह के रचनात्मक प्रयास करने चाहिए ?  अपनी राय हमें लिख भेजिए और हाँ  यदि आपके पास  किसी ऐसे व्यक्ति या संस्था के बारें में कोई  जानकारी है जिसने हिन्दी के विकास, विस्तार या प्रचार के लिए कोई रचनात्मक तरीका अपनाया है तो उसकी जानकारी हमें भेजे ताकि हम उसे यहाँ स्थान दे सकें .   


(खबर स्रोत- भास्कर.काम)


प्रकाशन दिनांक : 27-06-2011
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