हिंदी जगत

तुम हिन्दी सीखो हम कन्नड़

"भारत में भाषा के नाम पर तलवार निकालने वाले लोगों को बेंगलुरु में पढ़ रहे हिन्दी भाषी क्षेत्रों के कुछ विद्यार्थियों ने एक नई राह दिखाई है. वहाँ सॉफ्टवेयर और कम्प्यूटर इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे कई विद्यार्थी बेंगलुरु के स्थानीय लोगों से कन्नड़ सीख रहे है और बदले में उन्हें हिन्दी सीखा रहे है. "

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बंगलुरू से एमटेक करने वाले मोदीनगर के दीनबंधु और आइआइएफटी में मास्टर डिग्री कर वहां नौकरी कर रहे श्रेय वशिष्ठ सहित ऐसे कई युवा है जो बेंगलुरु में किराए से अथवा पेइंग गेस्ट के रूप में रहते है. इनको शुरू में भाषा के कारण काफी समस्या होती थी.मकान मालिक को न तो हिंदी आती थी न अंग्रेजी.इन समस्याओं से निपटने के लिए कुछ युवाओं ने एक अनोखा तरीका ढूंढ निकाला है जो इनके लिए मददगार साबित हो रहा है और जिससे हिन्दी का प्रसार भी हो रहा है.ये लोग अपने मकान मालिक से कन्नड़ सीख रहे हैं और  बदले में उन्हें हिंदी सिखा रहे हैं.
ये एक ऐसा तरीका है जिससे भाषाई संवाद भी शुरू हो रहा है और हिन्दी और कन्नड़ दोनों का प्रसार हो रहा है. वास्तव में यही एकमात्र तरीका है जिसे अपनाकर हिन्दी और अन्य सभी भारतीय भाषाएँ अपना विकास कर सकती है. यदि हर हिन्दी भाषी व्यक्ति कम से कम एक दूसरी भारतीय भाषा सीखने का प्राण कर ले तो भारत की अधिकाँश भाषाई समस्याएं भी दूर होंगी और देश में समन्वय और सोहार्द भी बढ़ेगा.

समाचार सन्दर्भ - जागरण

 


प्रकाशन दिनांक : 19-09-2012
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