हिंदी गौरव

तीन देशों में हिन्दी की अलख जगाने वाले हिन्दी योगी की कहानी

"दुनिया के कोने-कोने में ऐसे कई विदेशी लोग है जो हिन्दी के प्रचार-प्रसार और विकास के लिए तन,मन और धन से समर्पित है. मै तो इन्हें विदेशी कहने से भी झिझकता हूँ क्योकि सही मायने में तो ये कई सारे भारतीय लोगों से भी ज़्यादा भारतीय है. ऐसे कई लोग है जिनकी मातृभाषा हिन्दी नहीं है,जो न तो भारत में जन्मे है और ना ही प्रवासी भारतीय है मगर फिर भी अपने देश में हिन्दी का झंडा बुलंद करने के लिए लगातार प्रयासरत है."

hindi teacher hindi in ujbekistan russia israil telaveev university hindi deprtment

ये कहानी हिन्दी के एक ऐसे साधक की है जो पिछले तीस सालों से हिन्दी की धूनी रमाकर बैठे है और एक या दो नहीं बल्कि तीन देशों में हिन्दी की आवाज लोगों तक पहुंचाकर हज़ार के आसपास लोगों को हिन्दी सिखाई है.हिन्दी के लिए समर्पित इस अनूठे व्यक्तित्व की खासियत ये है वे जहां भी रहे वहाँ हिन्दी के बनाकर रहे. पहले अपने देश उजबेकिस्तान में बच्चो को हिन्दी और उर्दू पढाई फिर रूस में पहुंचकर लोगों को हिन्दी से जोडा और फिलहाल इज़राइल में हिन्दी का सन्देश फैला रहे है.

हिन्दी के इस साधक को शुरुआत में हिन्दी से कोई मोहब्बत नहीं थी.वे भाषा अनुवाद में अपना भविष्य तलाशना चाहते थे. उनके सामने कालेज में पढाई के लिए तीन विकल्प थे.अरबी,फारसी या हिन्दी. और किसी अज्ञात प्रेरणा से उन्होंने हिन्दी को चुन लिया. वो भी नहीं जानते कि इसका आधार क्या था. क्योंकि जिस समय उन्होंने हिन्दी विषय चुना था उस समय तो वे भारत के बारे में ज़्यादा नहीं जानते थे.कालेज में हिन्दी की पढाई करने के बाद उन्हें अपने देश में एक रेडियो स्टेशन में अनुवादक का काम मिल गया. अभी भी हिन्दी से कोई प्रेम नहीं हुआ था.फिर ये नौकरी छोडकर उन्होने  एक स्कूल में  पढ़ाना शुरू किया. बस ये एक ऐसा कदम था जिसने उनकी मंजिल तय कर दी जो उन्हें हिन्दी तक पहुंचाती थी.

कुछ समय बाद वे अपना देश छोडकर रूस जा पहुंचे, ज़ाहिर है वहाँ भी उन्होंने लोगो को हिन्दी से जोड़ा और इसके बाद पहुंचे इज़राइल. इज़राइल के सबसे बड़े शिक्षा केंद्र तेल अवीव विश्व विद्यालय में हिन्दी के प्रमुख के रूप में उन्होंने हिन्दी शिक्षण के नए आयाम स्थापित किये. इज़राइल के युवाओं को हिन्दी से जोडने के लिए हिब्रू भाषा में किताबे लिखी. युवाओं को हिन्दी फिल्मों के माध्यम से हिन्दी सीखाने का अभिनव प्रयोग किया और और ये सिलसिला लगातार जारी है.क्या आप हिन्दी के इस साधक के बारे में कुछ और जानना चाहेंगे ??यहाँ पढ़िए हिन्दी के इस साधक द्वारा लिखे गए लेख हिन्दी क्यों? का पहला भाग ,इस लेख का दूसरा भाग यहाँ तथा तीसरा भाग यहाँ देखा जा सकता है.

-सुबोध

 


प्रकाशन दिनांक : 23-06-2012
print

नवीनतम लेख

a summer camp was organised for teaching hindi in minsk city of belarus by alesia.
this is a poem written by rajendra sinh fariyadi on water
higher education in hindi, atal bihari vajpeyi, hindi university, hindi teaching, bhopal, mohan lal chipa