वैश्विक अवसर

हिन्दी की सेवा भी करे,थोड़ा मेवा भी पाएं

"यदि आप यूनीकोड में हिन्दी टाइपिंग जानते है, हिन्दी के लिए कुछ करना चाहते है और इसके माध्यम से धनार्जन भी करना चाहते है तो ये अवसर आपके लिए ही है. इंटरनेट पर हिन्दी की उपयोगी सामग्री और यूनीकोड के चलन को बढाने के लिए जर्मनी में रहने वाले प्रतिभाशाली युवा और हिन्दी सेवी श्री रजनीश मंगला ने अत्यंत सराहनीय पहल की है.इससे जुडकर आप हिन्दी की सेवा भी कर सकते है और थोड़ा सा मेवा भी पा सकते है."

rajneesh mangla munikh Germani basera.de movement for digitising hindi books

जर्मनी के सबसे बड़े शहर म्यूनिख में रहने वाले रजनीश उन प्रवासी युवाओं में से है जिनके मन में हिन्दी के लिए गहरी आत्मीयता भी है और कुछ करने की तड़प भी. इंटरनेट पर हिन्दी की ज़्यादा से ज़्यादा सामग्री दी जा सके इसके लिए उन्होंने एक बेहद रचनात्मक पहले की है.इसके तहत विभिन्न विषयों पर लिखी पुस्तकों को युनिकोड में लिख कर इण्टरनेट पर डाला जा रहा है.जर्मनी से हिन्दी और जर्मन भाषा में बसेरा नामक पत्रिका निकालने वाले रजनीश बताते है कि विश्व के किसी भी कोने में रहने वाला कोई भी हिन्दी प्रेमी व्यक्ति उनकी इस रचनात्मक पहल का हिस्सा बन सकता है. 
हिन्दी होम पेज से चर्चा में उन्होंने कहा कि, इससे जुडने के लिए कोई भी व्यक्ति किसी भी विषय पर हिन्दी में लिखी किसी पुरानी किताब को एम.एस.वर्ड साफ्टवेयर में यूनीकोड पर टाइप कर rajneesh.mangla@gmail.com पर मेल कर सकता है. ये किताब कहानी, उपन्यास या किसी ऐसे अन्य

विषय पर हो सकती है जो लोगों के लिए उपयोगी हो. टाइप करने के पहले कृपया गूगल पर हिन्दी और अंग्रेजी में किताब का शीर्षक और लेखक का नाम टाइप करके ये ज़रूर देख ले कि आप जिस किताब को टाइप कर रहें है कही वो पहले से ही इंटरनेट पर उपलब्ध तो नहीं है.यदि वो किताब पहले से नेट पर उपलब्ध है तो ऐसे में उसे छोडकर आप किसी दूसरी किताब को देखे.लोगों द्वारा मेल पर भेजी गई सभी पुस्तक इंटरनेट पर यहाँ प्रकाशित की जाएँगी ताकि उसे हिन्दी भाषी लोग मुफ्त में पढ़ सकें और डाउनलोड भी कर सके.उन्होंने बताया कि इस हेतु चुनी गई प्रत्येक किताब पर प्रति शब्द दस पैसे की दर से पारिश्रमिक दिया जाएगा. इसका भुगतान प्रेषक के बैंक खाते में भारतीय रुपयों में किया जाएगा.
यदि आप चाहे तो रजनीश जी की इस नेक पहल में आर्थिक सहयोग भी कर सकते है.यदि संभव हो तो कृपया उनके इस अभियान से ज़रूर जुड़े ताकि नेट पर हिन्दी का कारवां और आगे बढ़ सके.   


प्रकाशन दिनांक : 21-06-2012
print

नवीनतम लेख

a summer camp was organised for teaching hindi in minsk city of belarus by alesia.
BOOK WRITER, POEM, POET, SUBODH