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माँ, माँ बच्चे की हर चोट पर सिसकी है - विश्व मातृ दिवस पर विशेष

"मई महीने का दूसरा रविवार विश्व के ज़्यादातर देशों में मातृ दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज उज्जैन के प्रसिद्ध कवि श्री ओम व्यास ओम की ये कविता पढ़ और सुनकर आपकी आँखों में शायद अपना बचपन तैरने लगेगा और हो सकता है आँखों में भी नमी आने लगे. "

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हमारे जीवन का हर दिन माँ के नाम समर्पित होना चाहिए क्योंकि वो ही हमारे जीवन का आधार है. रिश्तों के नाम पर दिन मनाना भारत की परम्परा नहीं है मगर विश्व के ज़्यादातर देशों में आज का दिन माँ के नाम पर समर्पित किया जाता है ऐसे मै आज प्रस्तुत है माँ के नाम लिखी ये मार्मिक कविता. 

माँमाँ संवेदना हैभावना है अहसास है
माँमाँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है,

माँमाँ रोते हुए बच्चे का खुशनुमा पलना है,
माँमाँ मरूथल में नदी या मीठा सा झरना है,

माँमाँ लोरी हैगीत हैप्यारी सी थाप है,
माँमाँ पूजा की थाली हैमंत्रों का जाप है,

माँमाँ आँखों का सिसकता हुआ किनारा है,
माँमाँ गालों पर पप्पी हैममता की धारा है,

माँमाँ झुलसते दिलों में कोयल की बोली है,
माँमाँ मेहँदी हैकुमकुम हैसिंदूर हैरोली है,

माँमाँ कलम हैदवात हैस्याही है,
माँमाँ परमात्मा की स्वयं एक गवाही है,

माँमाँ त्याग हैतपस्या हैसेवा है,
माँमाँ फूँक से ठँडा किया हुआ कलेवा है,

माँमाँ चूडी वाले हाथों के मजबूत कंधों का नाम है,
माँमाँ काशी हैकाबा है और चारों धाम है,

माँमाँ चिंता हैयाद हैहिचकी है,
माँमाँ बच्चे की हर चोट पर सिसकी है,

माँमाँ चुल्हा-धुँआ-रोटी और हाथों का छाला है,
माँमाँ ज़िंदगी की कड़वाहट में अमृत का प्याला है,

माँमाँ पृथ्वी हैजगत हैधूरी है,
माँ बिना इस सृष्टि की कल्पना अधूरी है,

कुछ साल पहले लखनऊ में सहारा परिवार और बच्चन परिवार द्वारा आयोजित कवि सम्मलेन में श्री ओम व्यास ओम ने ये कविता मंच पर पढ़ी थी, उस प्रस्तुति को यहाँ देखा जा सकता है. 

 

 

प्रकाशन दिनांक : 13-05-2012
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