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मिलिए जापान में रहने वाले हिन्दी प्रेमी श्री मात्सु से

"जापान की राजधानी तोकियो के किनारे, छोटे उपनगर में रहने वाला एक मामूला-सा पक्का जापानी. अरमान है मेरा,हिंदी की क्षमता सुधारने के लिए सहायता, फिर तो और कुछ भी हो जाएँ!! जो भी हो आ जाएँ!! .......मिलिए जापान में रहने वाले एक हिन्दी प्रेमी से "

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जापान में रहने वाले श्री मात्सु के मन में हिन्दी के प्रति गहरी आत्मीयता है. हिन्दी के प्रति उनका प्रेम उनके इस हिन्दी चिट्ठे पर पहली नज़र में ही दिखने लगता है. आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि मात्सु ने सन २००४ में अपना ये चिट्ठा शुरू किया था. तबसे वे लगातार इस चिट्ठे के माध्यम से भारत और भारतवासियों को जापान से जोडने का प्रयास कर रहे है. हिन्दी के विद्यार्थी रहे मात्सु अपने इस चिट्ठे पर भारत के बारे में भी लिखते है और जापान के बारे में भी. हिन्दी के बारे में मात्सु के प्रयास किसी संस्था से कम नहीं है इसलिए हिन्दी होम पेज पर ये पोस्ट समाचार की श्रेणी में नहीं बल्कि संस्थाओं की श्रेणी में रखी गई है.

यदि आप भारत कों उनकी नज़रों से देखना चाहते है तो उनका चिट्ठा देखे और यदि आप जापान के बारे में जानना चाहते है तो भी इस चिट्ठे को ज़रूर देखे.यहाँ उन्होंने जापानी भाषा की तीनों लिपियों को हिन्दी में समझाने की कोशिश भी की है. श्री मात्सु का ये चिट्ठा ज़रूर देखे और वहाँ  अपनी प्रतिक्रियाँ भी व्यक्त करें ताकि वे इस चिट्ठे पर और भी अधिक सक्रियता से लेखन कर सकें.

 


प्रकाशन दिनांक : 19-01-2012
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