संसाधन हिंदी साहित्य

यहाँ पढ़िए श्रीलालजी की कालजयी रचना राग दरबारी

"श्रीलालजी ने वैसे तो लगभग दस उपन्यास, नौ व्यंग्य संग्रह, कई कहानियां, संस्मरण और लघुकथाएं लिखी मगर राग-दरबारी उनकी कालजयी रचना है, जिसने हिन्दी जगत में उन्हें एक अलहदा मुकाम दिलवाया.हिन्दी की इस अप्रतिम रचना को आप यहाँ से डाउनलोड कर पढ़ सकते है. "

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रागदरबारी का १६ भारतीय भाषाओं सहित अंग्रेजी में भी अनुवाद हुआ और दूरदर्शन ने इस पर एक धारावाहिक भी बनाया. १९६८ में प्रकाशित इस उपन्यास के लिए शुक्लजी को १९७० में साहित्य अकादमी से सम्मानित किया गया था.इस उपन्यास में शिवपाल गंज के बहाने शुक्लजी ने आज़ादी के बाद भारतीय समाज में फैले भ्रष्टाचार,अराजकता, लूट-खसोट, और लोकतंत्र के नाम पर चल रहे लूटतंत्र पर बहुत ही सटीक प्रहार किए है.

ये ऐसा उपन्यास है जिसे पढकर पाठक को इसके चरित्र अपने आसपास की दुनिया में दिखाए देने लगते है. ऐसा लगता है कि ये शिवपालगंज की नहीं बल्कि  हमारे ही गाँव, कस्बे या शहर की कहानी है. ये हिन्दी की एक ऐसी किताब है जिसे एक बार पढने पर मन नहीं भरता और बार-बार पढने पर भी संतुष्टि नहीं होती. हिन्दी वेबसाईट हिन्दी कुन्ज ने इस उपन्यास को एक ई-बुक की शक्ल देकर इंटरनेट पर उपलब्ध कराया है. इसे हिन्दी कुंज द्वारा दी गई इस कड़ी से भी डाउनलोड  किया जा सकता है.इसे पढने के बाद हिन्दीकुंज के संचालकों को शुक्रिया ज़रूर अदा किजीयेगा. 

 


प्रकाशन दिनांक : 28-10-2011
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