विश्व में हिंदी विश्व हिन्दी सम्मेलन २०१२

इन चुनौतियों को नहीं देखा विश्व हिन्दी सम्मेलन ने

"जोहान्सबर्ग में तीन दिनों से चल रहा हिन्दी का वैश्विक सम्मेलन कल पूरा हुआ. सम्मेलन में कई बाते हुई मगर आयोजन की चमक-धमक में हिन्दी को वैश्विक स्वरुप देने के लिए कई महत्वपूर्ण बातें छूट भी गई. सूचना तकनीक के विशेषज्ञ के रूप में नेट पर हिन्दी को स्थापित करने में लगे श्री हरिरामजी ने गूगल के एक चर्चा समूह में ऐसे कुछ मुद्दे उठाये है जिनका जवाब हिन्दी सम्मेलन में ढूंढा जाना था, मगर किसी का ध्यान इन मुद्दों पर नहीं गया... "

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मोबाइल पर हिन्दी का प्रयोग

मोबाईल फोन आज हर व्यक्ति की ज़रूरत बन गया है. अब सस्ते फोन में भी हिन्दी में एसएमएस/इंटरनेट/ईमेल की सुविधा है, लेकिन अधिकांश लोग हिन्दी भाषा के सन्देश लेटिन/रोमन लिपि में लिखकर भेजते है क्योंकि मोबाइल पर हिन्दी  लिखना कठिन भी है और महँगा भी.हिन्दी में एक वर्ण/स्ट्रोक तीन बाईट का स्थान घेरता है, इसलिए वो अंग्रेजी के सन्देश की तुलना में तीन गुना महँगा होता है. इस स्थिति को बदलने की ज़रूरत है. इसके लिए तकनीकी प्रयास आवश्यक और अनिवार्य है मोबाइल पर हिन्दी संदेशों को सस्ता बनाने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं? और इस दिशा में क्या करने की ज़रूरत है इस बारे में इस सम्मेलन में तकनीकी चर्चा होती तो बेहतर होता. 

ऑनलाइन फार्म में हिन्दी का प्रयोग

दूसरा मुद्दा चाहे ऑनलाइन फार्म में हिन्दी के प्रयोग का है.चाहे  आयकर रिटर्न फार्म भरना हो, या रेलवे का टिकिट करना हो या किसी अन्य वेबसाइट में कोई फार्म भरना हो, अधिकांश साईट पर फ़ार्म अंग्रेजी में ही भरना पड़ता है... Sybase, powerbuilder आदि डैटाबेस अभी तक हिन्दी युनिकोड का समर्थन नहीं दे पाते. MS SQL Server में भी हिन्दी में ऑनलाइन डैटाबेस में काफी समस्याएँ आती हैं.अतः मजबूरन् सभी बड़े संस्थान अपने वित्तीय संसाधन, Accounting, production, marketing, tendering, purchasing आदि के सारे डैटाबेस अंग्रेजी में ही कम्प्यूटरीकृत कर पाते हैं. जो संस्थान पहले हाथ से लिखे हुए हिसाब के खातों में हिन्दी में लिखते थे कम्प्यूटरीकरण होने के बाद वे भी अंग्रेजी में ही करने लगे हैं.हिन्दी (देवनागरी) में भी ऑनलाइन फार्म भरने के लिए उपयुक्त डैटाबेस उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?और क्या करने की ज़रूरत है इस बारे में हिन्दी सम्मेलन में विचार-विमर्श होना था. 

हिन्दी आपरेटिंग सिस्टम


सन् 2000 से कम्प्यूटर आपरेटिंग सिस्टम स्तर पर हिन्दी का समर्थन इन-बिल्ट उपलब्ध हो जाने के बाद आज 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक अधिकांश जनता/उपयोक्ता इससे अनभिज्ञ है. आम जनता को जानकारी देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? अभी तक हिन्दी की मानक वर्तनी के अनुसार युनिकोड आधारित कोई भी वर्तनी संशोधक प्रोग्राम/सुविधा वाला साफ्टवेयर आम जनता के उपयोग के लिए निःशुल्क डाउनलोड व उपयोग हेतु उपलब्ध नहीं कराया जा सका है. जिसके कारण हिन्दी में अनेक अशुद्धियाँ के प्रयोग पाए जाते हैं. इसके लिए क्या व्यवस्थाएँ की जा रही हैं?

ये कुछ ऐसे प्रश्न है जिनके  जवाब ढूंढें जाते तो ये सम्मेलन हिन्दी के विकास में मील का पत्थर साबित होता मगर अफसोस की बात ये है कि वहाँ इन मुद्दों पर कोई चर्चा ही नहीं हुई. श्री हरिरामजी ने ये और कुछ और प्रश्न इस गूगल समूह पर प्रस्तुत किये है. उनका मूल लेख इस पेज पर पढ़ा जा सकता है.

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प्रकाशन दिनांक : 25-09-2012
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