विश्व में हिंदी विश्व हिन्दी सम्मेलन २०१२

शायद उन्नीसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन की शुरुआत भी इसी संकल्प के साथ होगी

"कहावत तो सिर्फ नो दिन में अढाई कोस चलने की बात करती है मगर यदि इसे विश्व हिन्दी सम्मेलन के नज़रिए से देखा जाए तो इसे नो दिन की जगह सैतीस साल का करना होगा.१९७५ में हुए पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन में भी हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने का संकल्प लिया गया था और २०१२ में भी यही संकल्प दोहराया गया है.शायद उन्नीसवें सम्मेलन की शुरुआत भी इसी संकल्प के साथ होगी. "

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पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन का उदघाटन १० जनवरी १९७५ को नागपुर में हुआ था. उसके उदघाटन सत्र में हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने की बात कही गई थी. सम्मेलन के आखरी दिन इस आशय का एक प्रस्ताव पारित हुआ था.इस बात को सैतीस बरस बीत चुके है.कल यानी २२ सितम्बर को दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े शहर जोहान्सबर्ग में नवे विश्व हिन्दी सम्मेलन का उदघाटन हुआ. इस शुभारम्भ सत्र की अध्यक्षता भारत की विदेश राज्य मंत्री श्रीमती प्रणीत कौर ने की. इसके उदघाटन सत्र में उन्होंने भी हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने की बात कही.

उद्घाटन के बाद पत्रकारों ने जब श्रीमती कौर से पूछा कि पिछले सैतीस सालों में हम हिन्दी को ये दर्जा क्यों नहीं दिला पाए तो उन्होंने जो जवाब दिया उससे ये स्पष्ट हो गया कि संयुक्त राष्ट्र के सभाग्रह में जाने के लिए हिन्दी को अभी और भी कई सालों तक इंतज़ार करना पडेगा. पिछले सैतीस सालों में भारत सरकार द्वारा इस संबंध में किये गए प्रयासों की जानकारी देने की जगह उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि इसके लिए महासभा के सदस्य देशों का समर्थन हासिल करने के प्रयास जारी हैं.सवाल ये है कि सरकार ने अभी तक इसके लिए प्रयास किये ही कितने है? इसके लिए धन का मुद्दा भी उठा. विदेश राज्यमंत्री ने कहा कि यह सच्चाई है कि इसमें बहुत अधिक खर्च आएगा.सवाल ये है कि जब पिछले सैतीस साल में भारत सरकार हिन्दी के लिए ये राशि नहीं जुटा पाई तो अब कैसे जुटा लेगी ?

यहाँ ये बताना भी मौजू होगा कि हिन्दी के लिए पैसे का रोना रो रही इस सरकार के मनमोहक मुखिया ने इसी बरस जून के महीने में मेक्सिको में हुई जी-20 समूह की बैठक में दिवालियेपन की कगार तक जा पहुंचे यूरोपियन देशों को ५ हज़ार करोड की भारी भरकम राशि का अनुदान देने की घोषणा की थी. मुझे लगता है इसका १० प्रतिशत भी हिन्दी के लिए रोक लिया जाए तो हिन्दी सिर्फ संयुक्त राष्ट्र की ही नहीं बल्कि विश्व की भाषा बन सकती लेकिन सवाल ये है कि ऐसा करेगा कौन ? तो कोई मुगालता मत पालिये तय मानिए कि उन्नीसवे विश्व हिन्दी सम्मेलन की शुरुआत भी इसी संकल्प के साथ होगी कि हमें हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाना है और इसके लिए हम पूरी गंभीरता के साथ प्रयास कर रहे है.

सुबोध
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प्रकाशन दिनांक : 23-09-2012
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