हिंदी गौरव

आई स्पीक हिन्दी

"अमेरिका का एक नौजवान कई सालों से हिन्दी सीखने की कोशिश कर रहा था.वो किसी ऐसे रोचक आडियो वीडियो माध्यम को तलाश रहा था जिससे हिन्दी सीखना कुछ आसां हो जाए मगर अफसोस, उसे कही भी ऐसा कोई माध्यम नहीं मिला.आखिरकार उसने खुद कुछ ऐसा किया जिससे उसने खुद हिन्दी सीखी और फिर दूसरों को भी सिखाई.पढ़िए हिन्दी के एक ऐसे भक्त की कहानी जो इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के हज़ारों लोगों को हिन्दी सीखा रहा है. "

ispeakhindi.comNathan Price In 2010, ISpeakHindi.com

इस सजीले नौजवान से मिलिए.ये है नाथन प्राइस.  अमेरिका के टेक्सास शहर में रहने वाले नाथन की हिन्दी से लगाव की कहानी बहुत ही रोचक भी है और प्रेरक भी. ये कहानी ये बताती है कि यदि कोई ठान ले तो तमाम मुश्किलों के बावजूद कैसे मंजिल हासिल की जा सकती है और ये भी बताती है हिन्दी किस तरह से परायों को इतना अपना बना लेती है कि वो दुनिया भर के लोगों को हिन्दी से जोडने लगते है. नाथन कोई लेखक या साहित्यकार नहीं है लेकिन यदि हिन्दी की सेवा कसौटी पर देखा जाए तो वे हिन्दी के कई बड़े-बड़े लेखक, कवि और साहित्यकारों पर भारी पड़ेंगे.
नाथन की पत्नी श्रीमती सोनियाजी हिन्दी भाषी है. शादी के बाद से नाथन हिन्दी सीखने की कोशिश कर रहे थे, इस काम में उन्हें सोनिया जी के माता पिता से भी मदद मिल रही थी  मगर बात बन नहीं पा रही थी. नाथन हिन्दी पर उतनी पकड़ नहीं बना पा रहे थे जितनी वे चाहते थे. रोज सीखने और भूलने का सिलसिला लगातार चल रहा था. तभी उन दिनों अपने काम के सम्बन्ध में उन्हें जापान जाना पड़ा .ये बात सन २००७ की है. बस यही से उन्हें एक रास्ता मिला जिसने हिन्दी की मंजिल तक पहुँचाने में उनकी राह तो आसान कर ही दी बाद में हज़ारों लोगों को भी इस रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित कर दिया.
जापान में नाथन ने जापानी भाषा सीखाने वाले कुछ पोडकास्ट सुने . भाषा सीखने के लिए उन्हें ये तरीका बहुत ही आसान और दिलचस्प लगा. उन्होंने हिन्दी सीखने के लिए ऐसी ही पोडकास्ट तलाशने शुरू कर दिए मगर उन दिनों नेट पर ऐसे कोई भी पोडकास्ट नहीं थे जिनके माध्यम से हिन्दी सीखी जा सके.
हिम्मत हारने की जगह नाथन ने खुद ऐसे आडियो प्रोग्राम बनाना शुरू कर दिए और वे उन्हें पोडकास्ट भी करने लगे. रोज एक आडियो प्रोग्राम बनाने और उसे इंटरनेट पर प्रसारित करने का सिलसिला शुरू हो गया. नाथन अपने हिन्दी के पाठ को याद रखने के लिए पोडकास्टिंग करते थे मगर उनका तरीका इतना रोचक था कि धीरे-धीरे दूसरे लोग भी हिन्दी सीखने के लिए उनके पोडकास्ट सुनने और सब्स्क्राइब करने लगे. फिर उन्होंने हिन्दी सीखाने के लिए एक वेबसाईटआईस्पीकहिन्दी  की शुरुआत की.ये वेबसाईट हिन्दी सीखने और सीखाने वाले लोगों के लिए एक वैश्विक मंच की तरह उभर कर आई. इसकी लोकप्रियता इतनी बड़ी कि सन २००९ में नाथन ने हिन्दी सीखाने के लिए पेड सर्विस की शुरुआत की और अभी तक हज़ारों लोग उनकी इस वेबसाईट के माध्यम से हिन्दी सीख चुके है और सीख रहे है.  
आईस्पीकहिन्दी नामक उनकी ये वेबसाईट आज हिन्दी सीखाने वाली सबसे लोकप्रिय वेबसाइट्स में से एक है.नाथन की हिन्दी से जुड़ाव की ये कहानी आगे भी जारी रहेगी. ....

-सुबोध खंडेलवाल


प्रकाशन दिनांक : 16-05-2013
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