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चरागों पर हैं लगे हर तरफ कड़े पहरे

"गीत, गज़ल और कविता के इस मंच पर प्रस्तुत है श्री सुबोध श्रीवास्तव की ये गज़ल. हमें विश्वास है कि आज के हालात पर लिखी गयी ये ग़ज़ल आपको पसंद आएगी. "

gazal subodh shrivastav nazm charag

 

 

 

 

 

 

 

 

 

हमसे पूछो न कोई हालचाल जिन्दा हैं,
आपके शहर में हम बहरहाल जिन्दा हैं।
चरागों पर हैं लगे हर तरफ कड़े पहरे,
रोशनी होने लगी है हलाल जिन्दा हैं।
अब कोई रहता नहीं प्यार के मकानों में
और नफ़रत के हजारों सवाल जिन्दा हैं।
हर तरफ बिक रहा इंसाफ भी तराजू में,
हो गए मुंसिफों के हाथ लाल जिन्दा हैं।
बंट गईं रौनकें अब ईद और दीवाली की,
दीन और धर्म के सारे दलाल जिन्दा हैं।


 

योगदान : सुबोध श्रीवास्तव
प्रकाशन दिनांक : 05-09-2012
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