हिंदी गौरव

दिल में दर्द, चेहरे पर हंसी और कलम में व्यंग्य

"उत्सव और दिल है कि मानता नहीं जैसी फ़िल्में और ये जो है ज़िन्दगी,विक्रम और वेताल, सिंहासन बत्तीसी और प्याले में तूफान जैसे धारावाहिकों को अपनी लेखनी से संवारने वाले शरद जी १९८० के दशक में नवभारत टाइम्स में रोज एक स्तंभ लिखते थे. ये स्तंभ इतना लोकप्रिय था कि इसके दम पर नभाटा की बिक्री दोगुनी हो गई थी.ये शरदजी की अप्रतिम प्रतिभा का ही कमाल था.टाइम्स प्रबंधन उनके इस स्तंभ को अंग्रेजी में अनुवादित करवाकर टाइम्स ऑफ इंडिया में भी छपवाना चाहता था. उनकी जयंती के अवसर पर फिल्म राइटर्स एसोसिएशन ने अपने वेबपृष्ठ पर एक बेहद रोचक लेख और एक वीडियो दिया है. इसे पढ़ और देखकर उनके व्यक्तित्व का अंदाजा लगेगा "

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स्व. शरद जोशी पर लिखना हो तो सोचना पडता है कि उन्हें क्या कहकर संबोधित करें. लेखक, व्यंग्यकार, स्तंभकार,पत्रकार,रंगकर्मी,पटकथा लेखक,संवाद लेखक और इन सबसे बड़कर वो एक ऐसे संवेदनशील और रचनात्मक इंसान थे जो दूसरे के मन की बात को समझते थे और अपनी बात दूसरों के मन तक पहुंचाना जानते थे. २१ मई को मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में जन्मे शरद जोशी की जयंती है. इस अवसर पर फिल्म राइटर्स एसोसिएशन ने बेहद रचनात्मक ढंग से और बहुत आदर के साथ उन्हें याद किया है.एसोसिएशन ने अपने इस वेबपृष्ठ पर  शरद जी का रचना पाठ करते हुए एक वीडियो दिया है और इसी वीडियो में श्री महेश भट्ट, श्री कमलेश पांडेय, श्री आनंद महेन्द्रू, श्री राजेन्द्र गुप्ता, श्री मंजुल सिन्हा, श्री रमन कुमार, श्री रॉबिन भट्ट जैसे फिल्म निर्देशक, अभिनेता और लेखकों के उनके साथ के संस्मरणों को भी जोड़ दिया है. एसोसिएशन के वेबपृष्ठ से आभारपूर्वक ली गई कड़ी से ये वीडियो यहाँ देखा जा सकता है. 

यदि आप शरद जी के लेखन संसार से परिचित है तो भी और नहीं है तो भी इसे ज़रूर देखिये और एसोसिएशन की वेबसाईट पर दिए  इस लेख को भी पढ़िए. यदि आप शरद जी को जानते भी है तो भी हो सकता है इसे देख और पढकर उनके व्यक्तित्व के कुछ अनछुए पहलू आपके सामने आये और यदि दुर्भाग्य से अभी तक आप स्व.शरद जी से अपरिचित है तो इसके माध्यम से आप उनकी अप्रतिम प्रतिभा से रूबरू हो सकेंगे.



शरदजी की कई रचनाएँ उनकी पुत्री नेहाजी द्वारा संचालित इस साईट पर भी देखी जा सकती है. शरद जी से जुड़े श्री अशोक चक्रधर के संस्मरण यहाँ देखे जा सकते है.

 


प्रकाशन दिनांक : 20-05-2012
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