यदि आप विश्व की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक तमिल भाषा सीखना चाहते है तो ये शब्द कोष आपके बहुत काम आएगा. इसमें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में काम आने वाले तीन हज़ार से भी ज़्यादा हिन्दी शब्दों के तमिल पर्यायवाची शब्द दिए गए है.

इसका निर्माण हैदराबाद के आईआईआईटी के भाषा तकनीकी अनुसंधान संस्थान ने भारतीय भाषा कोष ...

Sheel\\\\\\\'s Dictionary is a very useful Hindi-English-Hindi Dictionary inclusive of more than 51000 words.
इंदौर के एक प्रतिभाशाली युवा शीलनिधि गुप्ता ने कड़ी मेहनत कर हिन्दी- अंग्रेजी और अंग्रेजी से हिन्दी का एक विशाल शब्दकोष विकसित किया है. शील के इस शब्दकोष का उपयोग बेहद आसान है. इसे अपने कम्प्यूटर में डालने के लिए साईट पर जाए नामक बटन पर क्लिक करें. ...

यदि आप चाणक्य फॉण्ट में लिखी सामग्री को यूनीकोड या कृति फॉण्ट अथवा यूनिकोड और कृति दोनों में बदलना चाहते है तो श्री अनुनादजी एवं श्री नारायण प्रसादजी द्वारा विकसित ये फॉण्ट परिवर्तक आपके लिए काफी उपयोगी साबित होगा.

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चाणक्य फॉण्ट में लिखी सामग्री को यूनीकोड में एवं यूनीकोड में लिखी सामग्री को चाणक्य में बदलने के लिए आप इस कन्वर्टर का इस्तेमाल कर सकते है.
इस बहुउपयोगी फॉण्ट परिवर्तक का विकास नेट पर हिन्दी को स्थापित करने के लिए संकल्पित श्री अनुनादजी एवं श्री नारायणजी ने किया है. हिन्दी के मशहूर चिट्ठाकार श्री रवि र...

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कृति सामान्यतः सबसे ज़्यादा प्रयोग में आने वाला हिन्दी फॉण्ट है मगर यूनीकोड नहीं होने के कारण नेट पर इसके उपयोग की कई सीमाएं है.
इस फॉण्ट परिवर्तक से आप कृति को मंगल एवं मंगल को कृति में बदल कर प्रयोग कर सकते है. ...

राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .