सुबोध श्रीवास्तव का योगदान

कानपुर के युवा पत्रकार सुबोध श्रीवास्तव कवि भी है और लेखक भी. उनके काव्य संग्रह 'पीढ़ी का दर्द' से ली गई ये कविता शायद आपको भी पसंद आएगी.
0 प्रतिक्रिया
यदि कवि पत्रकार भी हो तो उसकी दृष्टि और भी पैनी हो जाती है. कानपुर के पत्रकार सुबोध श्रीवास्तव ऐसे ही एक कवि है.यहाँ पढ़िए उनकी एक कविता जो अस्पताल के संवेदनहीन माहौल को आपके सामने जीवंत कर देगी.
0 प्रतिक्रिया
आपको भी कई बार लगता होगा कि अब मौसम बदल गया है. सिर्फ मौसम ही नहीं कई बार तो माहौल बदला हुआ सा लगता है. इसी बदले हुए परिवेश पर पढ़े युवा पत्रकार श्री सुबोध श्रीवास्तव की ये कविता, जो उन्होंने पीढ़ी का दर्द नामक अपने काव्य संग्रह से भेजी है...
4 प्रतिक्रिया
गीत, गज़ल और कविता के इस मंच पर प्रस्तुत है श्री सुबोध श्रीवास्तव की ये गज़ल. हमें विश्वास है कि आज के हालात पर लिखी गयी ये ग़ज़ल आपको पसंद आएगी.
3 प्रतिक्रिया
सुबोध श्रीवास्तव से मिलिए
पत्रकार/ कवि
जन्म: 4 सितम्बर, 1966 (कानपुर)
शिक्षा: परास्नातक
व्यवसाय: पत्रकारिता (वर्ष 1986 से)। 'दैनिक भास्कर', 'स्वतंत्र भारत' (कानपुर/लखनऊ) आदि में विभिन्न पदों पर कार्य।
विधाएं: नई कविता, गीत, गजल, दोहे, मुक्तक, कहानी, व्यंग्य, निबंध, रिपोर्ताज और बाल साहित्य। रचनाएं देश-विदेश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं,प्रमुख अंतरजाल पत्रिकाओं में प्रकाशित। दूरदर्शन/आकाशवाणी से प्रसारण भी।
प्रकाशित कृतियां:
-'सरहदें' (काव्य संग्रह)
-'पीढ़ी का दर्द' (काव्य संग्रह)
-'ईष्र्या' (लघुकथा संग्रह)
-'शेरनी मां' (बाल कथा संग्रह)
-‘कविता अनवरत-2’, ‘कानपुर के समकालीन कवि’ सहित कई काव्य संकलनों में रचनाएँ संकलित।
-विशेष: काव्यकृति 'पीढ़ी का दर्द' के लिए उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा पुरस्कृत।
-साहित्य/पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा 'गणेश शंकर विद्यार्थी अतिविशिष्ट सम्मान'।
-कई अन्य संस्थाओं से भी सम्मानित।
संपादन: 'काव्ययुग' ई-पत्रिका
संप्रति: 'आज' (हिन्दी दैनिक), कानपुर में कार्यरत।
संपर्क: 'माडर्न विला',10/518, खलासी लाइन्स, कानपुर (उ.प्र.)-208001, उत्तर प्रदेश (भारत)।
मोबाइल: +91-9305540745
फेसबुक:www.facebook.com/subodhsrivastava85
ट्विटर:www.twitter.com/subodhsrivasta3
ई-मेल: subodhsrivastava85@yahoo.in
राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .