Alesia का योगदान

बेलारूस। सात समुन्दर पर बेलारूस में हिंदी की अलख जगा रही अलेस्या मकोव्स्काया ने हिंदी सिखाने के लिए एक समर कैंप आयोजित किया। मिंस्क के बाहरी क्षेत्र में हुए इस कैंप में विद्यार्थियों को हिंदी के अक्षरों से रूबरू करवाया गया। पढ़ें कैसे सिखी रशियन विद्यार्थियों ने हिंदी ...
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पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद द्वारा आयोजित राष्ट्रीय हिन्दी विकास सम्मेलन ने पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी के प्रति लगाव और आत्मीयता को अभिव्यक्त किया. बेलारूस की हिन्दी विदुषी सुश्री एलिसिया विशेष रूप से इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आई थी. उन्ही की कलम से पढ़िए इस सम्मेलन की एक विशेष रिपोर्ट
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बेलारूस में जो लोग हिन्दी सीखना चाहते थे मैंने उन्हें खुद हिन्दी पढाने का फैसला किया. इसके लिए अखबारों में, इंटरनेट पर विभिन्न साइटों पर, पुस्तकालयों और सांस्कृतिक संस्थानों में विज्ञप्ति दी.शुरु में इसका कोई परिणाम नहीं हुआ. क्योंकि मेरी विज्ञप्तियां समाचार पत्रों में बहुत कम प्रकाशित होती थी मगर मैंने हिम्मत नहीं हारी और खूब प्रयास कर आखिरकार मिन्स्क में हिन्दी सीखने के उत्सुक कुछ लोगो को इकट्ठा कर ही लिया.
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नन्ही आलेसिया का हिन्दी से लगाव हिन्दी सिनेमा के महानायक राजकपूर की फिल्म आवारा के माध्यम से हुआ था. बड़ी होकर उन्होंने पहले बेलारूस में हिन्दी की प्राथमिक शिक्षा ली और फिर हिन्दी की और बेहतर पढाई करने के लिए वे भारत आई. आगे पढ़िए ...
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बेलारूस में रहने वाली सुश्री आलेसिया माकोव्स्काया, हिंदी की शिक्षिका भी है और अनुवादक भी.हिंदी से उनके जुड़ाव की कहानी जितनी रोचक है उतनी ही प्रेरक भी. भारत में रहने वाले लोग ये कल्पना भी नहीं कर सकते कि किसी विदेशी व्यक्ति के मन में हिंदी के लिए इतना प्रेम, इतनी लगन हो सकती है कि वो कई मुश्किलों का सामना करके हिंदी सीखे और फिर अपने देशवासियों को हिंदी से जोडने की कोशिश करे. प्रस्तुत है सुश्री आलेसिया द्वारा लिखे गए इस लेख का पहला भाग......
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बेलारूस की राजधानी मिंस्क में विश्व हिन्दी दिवस (१० जनवरी, २०१२ ) पर एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया.इस अवसर पर मिंस्क के विद्यार्थियों ने हिन्दी में कविताओ की प्रस्तुति देकर सबका दिल जीत लिया. भारत के राजदूतावास में हुए इस कार्यक्रम में वहाँ के कई हिन्दी प्रेमी और प्रवासी भारतीय भी उपस्थित थे.
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Alesia से मिलिए
अमेरिका का एक नौजवान कई सालों से हिन्दी सीखने की कोशिश कर रहा था.वो किसी ऐसे रोचक आडियो वीडियो माध्यम को तलाश रहा था जिससे हिन्दी सीखना कुछ आसां हो जाए मगर अफसोस, उसे कही भी ऐसा कोई माध्यम नहीं मिला.आखिरकार उसने खुद कुछ ऐसा किया जिससे उसने खुद हिन्दी सीखी और फिर दूसरों को भी सिखाई.पढ़िए हिन्दी के एक ऐसे भक्त की कहानी जो इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के हज़ारों लोगों को हिन्दी सीखा रहा है.
रवींद्र नाथ ठाकुर संभवतः विश्व के एकमात्र कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया है.कवि,लेखक,साहित्यकार,संगीतकार होने के साथ-साथ वे चित्रकार भी थे.बहुत कम लोग जानते है कि उन्होंने बच्चों के लिए भी खूब रचनाएँ लिखी थी. आज उनकी जयन्ती है इस अवसर पर प्रस्तुत है विख्यात साहित्यकार श्री प्रकाश मनुजी के चिट्ठे से आभारपूर्वक ली गई गुरुदेव की ये बाल कविता.
पढ़िए लेखक, पत्रकार और कवि सुबोध श्रीवास्तव के कविता संग्रह सरहदें की समीक्षा आचार्य ऋषभदेव जी द्वारा
विमलजी के इस चिट्ठे पर आप उनकी रचनात्मकता से रूबरू होंगे.. इसे जरुर देखें
राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .