Vivek Ranjan Shrivastava का योगदान

‘‘तन्हा न अपने आपको अब पाइयें जनाब, मेरी गजल को साथ लिये जाइये जनाब‘‘ ये और इस तरह की कई गज़लें लिखने वाले लेखक,संपादक और शायर श्री साज जबलपुरी को वर्तिका संस्था ने श्रद्धांजली दी. ड्रीमलैंड पार्क में हुई इस सभा में जबलपुर के कई रचनाकार उपस्थित थे.
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गीता सार्वकालिक ग्रंथ है. ये जीवन जीने की कला सिखाता है.संस्कृत न जानने वाले पाठकों भी गीता का वही काव्यगत आनन्द हिन्दी में मिल सके इस उद्देश्य से प्रो. सी. बी .श्रीवास्तव "विदग्ध" ने मूल संस्कृत श्लोक का हिन्दी में काव्यानुवाद किया है. ये काव्यानुवाद गीता को हिन्दी भाषा में प्रस्तुत करने का एक अनुपम प्रयास है.
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साहित्य की दृष्टि से तो हिंदी बहुत समृद्ध भाषा है लेकिन विज्ञान और तकनीक से जुड़े विषयों में हिंदी का खजाना खाली नज़र आने लगता है.ये खजाना भरने के लिए ये ज़रूरी है कि विज्ञान और तकनीक के विषयों पर हिंदी में लिखने वाले लोगों की जी भर के सराहना की जाए.जबलपुर में रहने वाले श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ऐसे ही लेखक है जिन्होंने हिंदी को समृद्ध करने की कोशिश की है.पढ़िए बिजली उत्पादन पर उनकी एक किताब के लोकार्पण की रिपोर्ट.
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Vivek Ranjan Shrivastava से मिलिए
आत्म विवरण

विवेक रंजन श्रीवास्तव विनम्र
जन्म २८.०७.१९५९ , मंडला म.प्र.
शिक्षा सिविल इंजी. में स्नातक, फाउंडेशन इंजीनियरिंग में भोपाल से स्नातकोत्तर उपाधियां , इग्नउ से मैनेजमेंट मे डिप्लोमा , सर्टीफाइड इनर्जी मैनेजर .
पिता वरिष्ठ साहित्यकार प्रो.सी. बी.श्रीवास्तव विदग्ध
माँ शिक्षाविद् श्रीमती दयावती श्रीवास्तव
पत्नी स्वतंत्र लेखिका श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव
बच्चे इंजीनियर अनुव्रता, अनुभा, अमिताभ
संप्रति अतिरिक्त अधीक्षण इंजीनियर म.प्र.राज्य विद्युत मंडल, जबलपुर
प्रकाशित किताबें आक्रोश .......कविता संग्रह ,रामभरोसे ......व्यंग संग्रह ,हिंदोस्ता हमारा .....नाटक संग्रह , जादू शिक्षा का ....प्रथम पुरस्कृत नाटक ,कौआ कान ले गया ....व्यंग संग्रह ,जल जंगल और जमीन ....विज्ञान
फोल्डर रानी दुर्गावती , व मण्डला परिचय
प्रकाशनाधीन किताबें कान्हा अभयारण्य परिचायिका .कविता संग्रह ,बिजली बचे तो बात बने , चिंतन मनन ,आदि
प्रसारण आकाशवाणी व दूरदर्शन से अनेक प्रसारण , रेडियो रूपक लेखन
विभिन्न सामूहिक संग्रहों में रचनायें प्रकाशित
अनेक नाटक निर्देशित ,पत्र पत्रिकाओ में नियमित लेखन
अनेक साहित्यिक संस्थाओ में सक्रिय पदेन संबद्धता , अध्यक्ष \"वर्तिका \" जबलपुर
संयोजक पाठक मंच जबलपुर
उपलब्धियाँ रेड एण्ड व्हाइट राष्टीय पुरुस्कार सामाजिक लेखन हेतु
जादू शिक्षा का .... म.प्र.शासन द्वारा प्रथम पुरस्कृत नाटक
रामभरोसे व्यंग संग्रह को राष्टीय पुरुस्कार दिव्य अलंकरण
सुरभि टीवी सीरियल में मण्डला के जीवाश्मो पर फिल्म का प्रसारण
ब्लागिंग २००५ से हिन्दी ब्लागिंग
ब्लाग http://vivekkevyang.blogspot.com
ईमेल vivekranjan.vinamra@gmail.com
संपर्क बंगला नम्बर ओ बी. ११ , विद्युत मंडल कालोनी , रामपुर , जबलपुर
सदा साथ ०९४२५८०६२५२
राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .