गुलशन सुखलाल का योगदान

विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर मॉरीशस के विभिन्न स्थानों पर हिन्दी पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन कर मॉरीशस हिन्दी संगठन ने यहाँ बसे हिन्दी भाषी लोगों को एक अनुपम सौगात दी है.अभी तक ये प्रदर्शनी मॉरीशस के पांच अलग-अलग स्थानों पर लगाई गई है जबकि रोज़बेल, कात्र बोर्न, पोर्ट लूइस और त्रिओले में २०,२२,२४ और २८ मई को लगाई जाएगी.
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हिन्दी भविष्य की भाषा है और भारत भविष्य का देश है. मॉरीशस के युवाओं को हमारा परामर्श है कि वे अपना और अपने देश का भविष्य उज्जवल करने के लिए हिन्दी के साथ जुड़े. ये बात मॉरीशस के कला एवं संस्कृति मंत्री मुखेश्वर चुनी तथा इलाके के सांसद व स्वास्थ्य मंत्री लोमेश बन्धु ने मॉरीशस में आयोजित नौ दिवसीय हिन्दी पुस्तक मेले के उदघाटन समारोह में कही.
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यदि आप दक्षिण अफ्रीका में होने वाले विश्व हिन्दी सम्मेलन में भाग लेना चाहते है तो इसे ज़रूर पढ़े.भारत के विदेश मंत्रालय ने सितम्बर में होने वाले इस सम्मेलन के लिए एक विशेष वेबसाईट बनाई है. इस साईट पर इस सम्मेलन के आयोजन से सम्बंधित सभी जानकारियाँ दी गई है.
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शायद मॉरीशस के इतिहास में ये पहला अवसर था जब माता-पिता और पुत्री का हिन्दी के प्रति समर्पण और रचनात्मकता एक ही मंच पर एक साथ प्रस्तुत और सम्मानित हुई. मौक़ा था विख्यात कवि और महात्मा गांधी संस्थान के सह संपादक श्री राज हीरामन,उनकी पत्नी और पुत्री द्वारा लिखी गई तीन किताबों के विमोचन का. इस कार्यक्रम में मॉरीशस की कई जानीमानी हस्तियाँ उपस्थित थी. पढ़िए विश्व हिंदी सचिवालय के स्थानापन महासचिव श्री गुलशनजी सुखलाल की एक रिपोर्ट
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दि. २६ अप्रैल. मॉरीशस के शिक्षा व मानव संसाधन मंत्री डॉ. वसंत कुमार बनवारी ने विश्व हिंदी सचिवालय की महत्वाकांक्षी पांच दिवसीय संगोष्ठी कार्यशाला का उदघाटन किया.इस अवसर पर भारतीय उच्चायोग में द्वितीय सचिव और भाषा अधिकारी श्री मीमांसक, श्रीमति पूर्णिमा वर्मन, श्री बालेंदु दधीच और श्री ललिता कुमार,श्री गुलशन सुखलाल और श्रीमती पूनम जुनेजा विशेष रूप से उपस्थित थे.
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गुलशन सुखलाल से मिलिए
अमेरिका का एक नौजवान कई सालों से हिन्दी सीखने की कोशिश कर रहा था.वो किसी ऐसे रोचक आडियो वीडियो माध्यम को तलाश रहा था जिससे हिन्दी सीखना कुछ आसां हो जाए मगर अफसोस, उसे कही भी ऐसा कोई माध्यम नहीं मिला.आखिरकार उसने खुद कुछ ऐसा किया जिससे उसने खुद हिन्दी सीखी और फिर दूसरों को भी सिखाई.पढ़िए हिन्दी के एक ऐसे भक्त की कहानी जो इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के हज़ारों लोगों को हिन्दी सीखा रहा है.
रवींद्र नाथ ठाकुर संभवतः विश्व के एकमात्र कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया है.कवि,लेखक,साहित्यकार,संगीतकार होने के साथ-साथ वे चित्रकार भी थे.बहुत कम लोग जानते है कि उन्होंने बच्चों के लिए भी खूब रचनाएँ लिखी थी. आज उनकी जयन्ती है इस अवसर पर प्रस्तुत है विख्यात साहित्यकार श्री प्रकाश मनुजी के चिट्ठे से आभारपूर्वक ली गई गुरुदेव की ये बाल कविता.
पढ़िए लेखक, पत्रकार और कवि सुबोध श्रीवास्तव के कविता संग्रह सरहदें की समीक्षा आचार्य ऋषभदेव जी द्वारा
विमलजी के इस चिट्ठे पर आप उनकी रचनात्मकता से रूबरू होंगे.. इसे जरुर देखें
राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .