राजेन्द्र सिंह कुँ का योगदान

कल भारत का स्वतन्त्रता दिवस था इस अवसर पर दिल्ली के युवा राजेन्द्र सिंह ने एक कविता लिखी है. हिन्दी होम पेज पर पढ़िए आज़ादी पर लिखी उनकी ये कविता ...
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नवोदित रचनाकारों को अक्सर एक ऐसे मंच की तलाश होती है जिसके माध्यम से वो अपनी प्रतिभा अभिव्यक्त कर सके.साहित्य परचम नामक संस्था हिन्दी के युवा कवियों को एक ऐसा ही अवसर देने जा रही है. \'साहित्य परचम\' द्वारा प्राकशित एक काव्य संगम में वरिष्ठ कवियों के साथ नवोदित रचनाकारों को भी प्रकाशन का अवसर दिया जाएगा. यदि आप अपनी भावनाओं को कविता के रूप में व्यक्त करते है तो आप भी रचनाएँ भेज सकते है. है.
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पहले सिर्फ भारत का विदेश मंत्रालय विश्व हिन्दी सम्मेलन आयोजित करता था मगर अब कई संस्थाएं ये कार्य करने लगी है. सितम्बर २०१२ में जोहान्सबर्ग में विदेश मंत्रालय के विश्व हिन्दी सम्मेलन के बाद संयुक्त अरब अमीरात में फरवरी २०१३ में एक और विश्व हिन्दी सम्मेलन होगा. इसका आयोजन साहित्यिक वेब पत्रिका और संस्था सृजनगाथा डॉट कॉम (www.srijangatha.com) द्वारा किया जाएगा.
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मुम्बई की प्रसिद्ध कहानीकार तथा वरिष्ठ पत्रकार सुमन सारस्वत के कथासंग्रह मादा का लोकार्पण ताशकंद में हुआ.वेब पत्रिका सृजनगाथा द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में २६ जून को हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति श्री विभूति विभुति नारायण राय और अन्य विभूतियों ने इस कथा संग्रह का लोकार्पण किया.
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कही मौसम के दरवाजों को बादल खटखटा रहे है, तो कही लोग बादलों की राह देख रहें है. बारिश के मौसम में बचपन से जुडी ढेर सारी यादें ताज़ा हो जाती है. पढ़िए राजेन्द्र जी की ऐसी ही एक कविता जो आपको भी बचपन में ले जाएगी...
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यहाँ पढ़िए युवा उद्यमी और कवि राजेन्द्र सिंह कुँवर -फरियादी की दो कविताएँ. आज के हालात पर लिखी ये कविताएँ संभवतः आपको पसंद आएंगी.
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हिन्दी का ये चिट्ठा युवा उद्यमी और कवि राजेन्द्र सिंह की रचनात्मकता और कविताओं से रूबरू कराता है.इस वेबपेज पर जीवन,प्रकृति और मनुष्य पर केंद्रित उनकी कविताएँ और विचार पढ़े जा सकते है.
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राजेन्द्र सिंह कुँ से मिलिए
मेरा जन्म दिल्ली में हुआ, शिक्षा उत्तराखंड के टेहरी जनपद के देवप्रयाग तहशील में क्रीर्तिनगर ब्लाक के सिरसेड ग्राम सभा के अधीन आने वाले एक छोटे से स्कूल में पांचवी तक की शिक्षा, छठवीं के लिए राजकीय इंटर कालेज नागराजाधार (कड़ाकोट) से बारहवीं तक और उसके बाद गढ़वाल विश्व विधायला हेमंती नंदन बहुगुणा से व्यक्तिगत रूप से बी. ए. और एम. ए. (हिंदी) 2000 में किया इसके साथ ही रोजगार की तलाश में 1995 में दिल्ली आया और छोटी सी नौकरी से शुरवात और 1998 में मेरी पहली रचना \'ख़बरों के सफ़र\' के में प्रकाशित हुई, हंस, आजकल ,वागर्थ, साहित्य अमृत ये मेरी रोज मरा वाली पुस्तकों की शुची में सबसे ऊपर है, अब तक कुछ छुट-पुट रचाएं भी समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं ............. इसके साथ ही \'\' बिखरे हुए अक्षरों का संगठन\'\' का संचालन ..........बाकि आप के सामने हूँ ....................अब आप लोगों के ऊपर मेरा भाग्य है
अमेरिका का एक नौजवान कई सालों से हिन्दी सीखने की कोशिश कर रहा था.वो किसी ऐसे रोचक आडियो वीडियो माध्यम को तलाश रहा था जिससे हिन्दी सीखना कुछ आसां हो जाए मगर अफसोस, उसे कही भी ऐसा कोई माध्यम नहीं मिला.आखिरकार उसने खुद कुछ ऐसा किया जिससे उसने खुद हिन्दी सीखी और फिर दूसरों को भी सिखाई.पढ़िए हिन्दी के एक ऐसे भक्त की कहानी जो इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के हज़ारों लोगों को हिन्दी सीखा रहा है.
रवींद्र नाथ ठाकुर संभवतः विश्व के एकमात्र कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया है.कवि,लेखक,साहित्यकार,संगीतकार होने के साथ-साथ वे चित्रकार भी थे.बहुत कम लोग जानते है कि उन्होंने बच्चों के लिए भी खूब रचनाएँ लिखी थी. आज उनकी जयन्ती है इस अवसर पर प्रस्तुत है विख्यात साहित्यकार श्री प्रकाश मनुजी के चिट्ठे से आभारपूर्वक ली गई गुरुदेव की ये बाल कविता.
पढ़िए लेखक, पत्रकार और कवि सुबोध श्रीवास्तव के कविता संग्रह सरहदें की समीक्षा आचार्य ऋषभदेव जी द्वारा
विमलजी के इस चिट्ठे पर आप उनकी रचनात्मकता से रूबरू होंगे.. इसे जरुर देखें
राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .