आयुष का योगदान

इंटरनेट ने हिन्दी के रचनाकारों को एक ऐसा वैश्विक मंच दिया है जिसके माध्यम से वो अपनी रचनाएँ पूरे विश्व के पाठकों तक पहुंचा सकते है और उनसे संवाद भी स्थापित कर सकते है. साहित्य ऑनलाइन ऐसा ही एक प्रयास है.
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पूना के सिटी प्राईड स्कूल में पढ़ रहे कुछ नए विद्यार्थी इन दिनों पूरे स्कूल के आकर्षण का केन्द्र बने हुए है.हिन्दी में बात करते इन लोगो को देखकर सबको हैरानी भी होती है और खुशी भी. दरअसल ये लोग अमेरिका के रहने वाले है और हिन्दी सीखने के लिए यहाँ आए है.
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आयुष से मिलिए
राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .