सीएस. प्रवीण कुमार का योगदान

हिंदी के दम पर नाम और पैसा कमाने वाले भारत के कुछ प्रमुख समाचार पत्र और चैनल हिंदी का बेड़ा गर्क करके अंग्रेजी का गुणगान करने में लगे है.इन लोगों ने पहले देवनागरी के अंकों को चलन से निकाला और अब धीरे-धीरे से हकाला गया और अब हिन्दी में रोमन को घुसा रहे है ताकि सुनियोजित ढंग से देवनागरी लिपि को भी खत्म किया जा सकें.
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हिन्दी से प्रेम करने वाले लोगों की कोई कमी नहीं.दुनिया के कोने-कोने में ऐसे हज़ारों लोग है जिनकी रूह को छूकर हिन्दी उनके दिलो दिमाग में बस गई है. बनारस में रहने वाले विनय कुमार दुबे ऐसे ही एक शख्स है. वे ऐसे चित्रकार हैं जो अपने केनवास पर सिर्फ साहित्यकारों की ही तस्वीरे बनाते हैं. पढ़िए हिन्दी के प्रति लगन रखने वाले एक अदभूत चित्रकार की कथा.
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नीदरलैंड के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक लेदान विश्व विद्यालय को हिन्दी के एक प्राध्यापक की आवश्यकता है. इस पद के लिए आवेदन की अंतिम तिथि २५ अप्रैल २०१२ है.
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हिन्दी के कारण भारत के समाचार माध्यमों (इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया) की पहुँच भी बढ़ी और ताकत भी.रुतबा भी बढ़ा और प्रभाव भी, मगर हिन्दी के दम पर अपना साम्राज्य स्थापित करने वाले समाचार माध्यम अब अपने परिदृश्य से हिन्दी को बाहर करने में जुट गए है. पढ़िए हिन्दी के संक्षेप अक्षरों यानी शार्ट फार्म्स पर श्री प्रवीण जैन का एक आलेख
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सीएस. प्रवीण कुमार से मिलिए
मैं एक निजी कम्पनी में \"विधि प्रमुख एवं कम्पनी सचिव\" के पद पर मुम्बई में कार्यरत हूँ.
अमेरिका का एक नौजवान कई सालों से हिन्दी सीखने की कोशिश कर रहा था.वो किसी ऐसे रोचक आडियो वीडियो माध्यम को तलाश रहा था जिससे हिन्दी सीखना कुछ आसां हो जाए मगर अफसोस, उसे कही भी ऐसा कोई माध्यम नहीं मिला.आखिरकार उसने खुद कुछ ऐसा किया जिससे उसने खुद हिन्दी सीखी और फिर दूसरों को भी सिखाई.पढ़िए हिन्दी के एक ऐसे भक्त की कहानी जो इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के हज़ारों लोगों को हिन्दी सीखा रहा है.
रवींद्र नाथ ठाकुर संभवतः विश्व के एकमात्र कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया है.कवि,लेखक,साहित्यकार,संगीतकार होने के साथ-साथ वे चित्रकार भी थे.बहुत कम लोग जानते है कि उन्होंने बच्चों के लिए भी खूब रचनाएँ लिखी थी. आज उनकी जयन्ती है इस अवसर पर प्रस्तुत है विख्यात साहित्यकार श्री प्रकाश मनुजी के चिट्ठे से आभारपूर्वक ली गई गुरुदेव की ये बाल कविता.
पढ़िए लेखक, पत्रकार और कवि सुबोध श्रीवास्तव के कविता संग्रह सरहदें की समीक्षा आचार्य ऋषभदेव जी द्वारा
विमलजी के इस चिट्ठे पर आप उनकी रचनात्मकता से रूबरू होंगे.. इसे जरुर देखें
राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .