शीलनिधि गुप्ता का योगदान

यदि आपको स्वादिष्ट भोजन बनाना या खाना पसंद है तो स्वाद का ये सफर आपके लिए ही है. हिन्दी के इस चिट्ठे पर ढेर सारे व्यंजन बनाने का तरीका दिया गया है. यहाँ भारतीय भोजन के साथ-साथ चाइनीज,इटालियन और थाई व्यंजन भी सीखे जा सकते है.
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दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में बसे सूरीनाम में भारतवासियों ने पहला कदम आज से लगभग २०० साल पहले रखा था. मजदूरों के रूप में यहाँ आए भारतीय लोग अपनी भाषा, संस्कृति और संस्कारों को बचाने और बढाने के लिए लगातार प्रयासरत है. विदुषी लेखिका भावना सक्सेना की पुस्तक -सूरीनाम में हिन्दुस्तानी - इन्ही प्रयासों की गाथा सुनाती है.
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बिहार के कुछ क्षेत्रों को पहले मगध के नाम से जाना जाता था वहाँ बोली जाने वाली भाषा मगही या मगधी के नाम से प्रसिद्ध है. हिन्दी सेवी और तकनीकी विशेषज्ञ श्री नारायण प्रसाद जी ने कई वर्षों तक मेहनत कर मगही हिन्दी का एक शब्द कोश बना दिया है जिसे उनके चिट्ठे पर देखा जा सकता ई. .
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शीलनिधि गुप्ता से मिलिए
अमेरिका का एक नौजवान कई सालों से हिन्दी सीखने की कोशिश कर रहा था.वो किसी ऐसे रोचक आडियो वीडियो माध्यम को तलाश रहा था जिससे हिन्दी सीखना कुछ आसां हो जाए मगर अफसोस, उसे कही भी ऐसा कोई माध्यम नहीं मिला.आखिरकार उसने खुद कुछ ऐसा किया जिससे उसने खुद हिन्दी सीखी और फिर दूसरों को भी सिखाई.पढ़िए हिन्दी के एक ऐसे भक्त की कहानी जो इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के हज़ारों लोगों को हिन्दी सीखा रहा है.
रवींद्र नाथ ठाकुर संभवतः विश्व के एकमात्र कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया है.कवि,लेखक,साहित्यकार,संगीतकार होने के साथ-साथ वे चित्रकार भी थे.बहुत कम लोग जानते है कि उन्होंने बच्चों के लिए भी खूब रचनाएँ लिखी थी. आज उनकी जयन्ती है इस अवसर पर प्रस्तुत है विख्यात साहित्यकार श्री प्रकाश मनुजी के चिट्ठे से आभारपूर्वक ली गई गुरुदेव की ये बाल कविता.
पढ़िए लेखक, पत्रकार और कवि सुबोध श्रीवास्तव के कविता संग्रह सरहदें की समीक्षा आचार्य ऋषभदेव जी द्वारा
विमलजी के इस चिट्ठे पर आप उनकी रचनात्मकता से रूबरू होंगे.. इसे जरुर देखें
राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .