डा. अकेलाभाइ का योगदान

पूर्वोत्तर भारत में यदि किसी को संगीत सीखना हो तो वो पहले हिन्दी सीखता है. यहाँ हिन्दी के प्रति लोगो के मन में अपनापन भी है और सम्मान भी.यहाँ हिन्दी की स्वीकार्यता को और बढ़ावा देने के लिए हिन्दी के साथ-साथ यहाँ की स्थानीय भाषाओं और बोलियों के समन्वय का प्रयास करना चाहिए .ये बात सीमा सुरक्षा बल के महानिरीक्षक श्री मनोहरलाल ने पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, शिलांग में हुई एक दिवसीय हिन्दी संगोष्ठी में कही.
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मेघालय में हिन्दी को स्थापित करने में लगी पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी अकादमी अब वहां के लोगों को हिन्दी टाइपिंग के प्रशिक्षण की व्यवस्था कर रही है. अकादमी के सचिव डॉ. अकेलाभाई ने ये घोषणा शिलांग में आयोजित हिंदी पखवाड़े के समापन समारोह में की. कि इस माह से कम्प्यूटर पर नागरी लिपि टाइपिंग सिखाई जाएगी. इस अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् के क्षेत्रीय अधिकारी श्री एन. मुनिश सिंह सहित कई हिन्दी सेवी उपस्थित थे.
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यदि आप मेघालय में अपने किसी मित्र,परिचित या रिश्तेदार को चिट्ठी भेज रहे है तो उनका पता हिन्दी में लिखिए. आपकी चिट्ठी सही समय पर सही जगह पहुंच जाएगी. पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी ने नागरी लिपि परिषद के साथ मिलकर इसके लिए मेघालय में एक अनूठी पहल की.
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अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर मेघालय की राजधानी शिलांग में अगले साल फिर से हिन्दी का एक कुम्भ लगेगा. हिन्दी के इस कुम्भ का आयोजन पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी के लिए समर्पित संस्था पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी द्वारा किया जाएगा. इस सम्मेलन के लिए अकादमी ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है. इसमें हिन्दी के लेखकों और हिन्दी सेवियों का सम्मान भी किया जाएगा.
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पूर्व के स्काटलैंड के रूप में प्रसिद्ध मेघालय की राजधानी शिलांग में भी हिन्दी का अच्छा खासा प्रभाव है. पहाड़ियों पर बसे इस खूबसूरत शहर में पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी,हिन्दी के विकास और विस्तार में लगी है.
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डा. अकेलाभाइ से मिलिए
आकाशवाणी के शिलांग केन्द्र में वरिष्ठ उद्घोषक.स्वतन्त्रता के बाद हिन्दी साहित्य के विकासमें आकाशवाणी का अवदान विषय पर शोध. हिन्दी,अंग्रेजी के अलावा असमीया भाषा के ज्ञाता एवं विद्वान. पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी के सचिव (मानद) पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी के लिए समर्पित व्यक्तित्व.
राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .