डॉ0 ज़ाकिर अली रजनी का योगदान

यदि आप जंतु विज्ञान में रूचि रखते है और सर्पों के बारे में कुछ जानना चाहते है तो हिन्दी का ये चिट्ठा ज़रूर देखे. अपने इस चिट्ठे के माध्यम से लखनऊ के ज़ाकिर अली रजनीश और डा अरविन्द मिश्र सांपों से जुडे अंधविश्‍वास दूर करने एवं उनके बारे में तत्थ्यात्मक जानकारी देने का प्रयास कर रहे है.
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यदि आप विज्ञान पर केन्द्रित आलेख पढ़ना चाहते है तो इस चिट्ठे को ज़रुर देखे. इसका उद्देश्य भारतीय समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना है.
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राष्ट्रगीत में भला कौन वह,भारत-भाग्य विधाता है? फटा सुथन्ना पहने जिसका,गुन हरचरना गाता है.
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यदि आपके मन के किसी कोने में अभी भी बचपन अंगडाई लेता है तो हिन्दी के इस चिट्ठे को ज़रूर देखे. बालमन नामक ये चिट्ठा बच्चों की प्रतिनिधि कविताओं की झलक दिखाता है.
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डॉ0 ज़ाकिर अली रजनी से मिलिए
लखनऊ का मूल निवासी। यहीं पर पला-बढ़ा और यहीं पर शिक्षा-दीक्षा भी हुई।

बचपन से साहित्‍य से लगाव रहा, सो कुछ कलम-घिसाई भी की। नतीजतन तमाम किताबें खाते में आईं और मान-सम्‍मान भी मिले।

वैज्ञानिक एवं साहित्‍यक संवाद के लिए समर्पित \\\'साइंटिफिक वर्ल्‍ड समूह\\\' (http://www.scientificworld.in) का वर्ष 2007 से संचालन।

विस्‍तृत परिचय के लिए देखें: http://za.samwaad.com/search/label/Entro
राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .