ओमप्रकाश कश्यप का योगदान

यदि आपकी मेज पर या अलमारी में कार्ल मार्क्स, प्लेटो, जेम्स मिल, एडम स्मिथ या अर्नस्टो चे ग्वेरा जैसे चिंतकों और विचारकों की किताबें रहती है और आप इनके विचारों पर किसी बहस में शामिल होना चाहते है तो आप ये चिट्ठा ज़रूर देखे. यहाँ आपको बौद्धिक खुराक मिलेगी जो आपके चिंतन को एक नई धार प्रदान करेगी.
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ओमप्रकाश कश्यप से मिलिए
15 जनवरी, 1959, जिला बुलंदशहर, भारत के एक गांव में. शिक्षा परास्नातक दर्शनशास्त्र. विगत तीस-बतीस वर्ष से शब्दों से दोस्ती. उपन्यास, कहानी, लघुकथा, व्यंग्य, लेख, विज्ञान, नाटक, कविता, बालसाहित्य, समाज, सहकारिता, जीवनी आदि विधाओं में नियमित लेखन-प्रकाशन. अभी तक तीस पुस्तकें प्रकाशित. अन्य चार प्रकाशनाधीन. साप्ताहिक समाचारपत्रों में व्यंग्य का॓लम तथा मासिक पत्रिका ‘सहकार संचय’ में सहकारिता आंदोलन पर करीब तीन साल तक नियमित लेखन. प्रकाशित पुस्तकों में पांच उपन्यास, चार नाटक संग्रह, तीन कहानी संग्रह, जीवनी, विज्ञान तथा व्यंग्य संग्रह, सहकारिता आंदोलन सहित करीब एक दर्जन पुस्तकें बालसाहित्य पर प्रकाशित. हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा सन 2002 में कविता पुस्तक ‘वृक्ष हमारे जीवनदाता’ के लिए ‘बाल एवं किशोर साहित्य सम्मान’. ‘बालसाहित्य समीक्षा’ के ‘शिवकुमार गोयल विषेषांक’ का अतिथि संपादन (अक्टूबर- 2005). साथ ही विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में सहस्राधिक रचनाएं प्रकाशित एवं चर्चित!

प्रकाशित कृतियां
उपन्यास : जुग-जुग जीवौ भ्रष्टाचार, विजयपथ, ढाई कदम, जहरबाद, मिश्री का पहाड़
कहानी-संग्रह: नन्ही का बटुआ, सोन मछली और हरी सीप, कहानी वाले बाबा, फरिश्ते.
व्यंग्य-संग्रह : ताकि मनोबल बना रहे (इक्यावन व्यंग्य रचनाएं)
नाटक-संग्रह : पुल कहां नही है, स्वयंवर में लड़की, उत्सर्ग
बालकविता-संग्रह : वृक्ष हमारे जीवनदाता
जीवनी : जननायक: डा॓. भीमराव आंबेडकर
विज्ञान : आइंसटाइन और आपेक्षिकता का सिद्धांत
लघुकथा-संग्रह : पगडंडियां
सहकारिता : सहकारिता आंदोलन : उदभव एवं विकास (दो खंड)
बालनाटिकाएं : हलवाई की दुकान से, दो राजा अलबेले
तथा बच्चों के लिए एक दर्जन से अधिक पुस्तकें
प्रकाशनाधीन : दंश (उपन्यास), स्याह हाशिये(कहानी संग्रह), समाजवादी आंदोलन की पृष्ठभूमि (दो खंड), सहकारिताः सिद्धांत, स्वरूप और संभावनाएं
ब्लाग : आखरमाला एवं संधान
Email : opkaashyap@gmail.com
opkaashyap@indiatimes.com

अमेरिका का एक नौजवान कई सालों से हिन्दी सीखने की कोशिश कर रहा था.वो किसी ऐसे रोचक आडियो वीडियो माध्यम को तलाश रहा था जिससे हिन्दी सीखना कुछ आसां हो जाए मगर अफसोस, उसे कही भी ऐसा कोई माध्यम नहीं मिला.आखिरकार उसने खुद कुछ ऐसा किया जिससे उसने खुद हिन्दी सीखी और फिर दूसरों को भी सिखाई.पढ़िए हिन्दी के एक ऐसे भक्त की कहानी जो इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के हज़ारों लोगों को हिन्दी सीखा रहा है.
रवींद्र नाथ ठाकुर संभवतः विश्व के एकमात्र कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया है.कवि,लेखक,साहित्यकार,संगीतकार होने के साथ-साथ वे चित्रकार भी थे.बहुत कम लोग जानते है कि उन्होंने बच्चों के लिए भी खूब रचनाएँ लिखी थी. आज उनकी जयन्ती है इस अवसर पर प्रस्तुत है विख्यात साहित्यकार श्री प्रकाश मनुजी के चिट्ठे से आभारपूर्वक ली गई गुरुदेव की ये बाल कविता.
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विमलजी के इस चिट्ठे पर आप उनकी रचनात्मकता से रूबरू होंगे.. इसे जरुर देखें
राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .